आगरा। फिरौती के लिए युवक का अपहरण करने के मामले में सुनवाई के दौरान अपहृत ने अदालत में आरोपियों को देखकर कहा कि इन्होंने मेरा अपहरण नहीं किया था। इस पर विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावी क्षेत्र नीरज कुमार बक्शी ने घटना के 25 साल बाद आरोपियों को बरी करने के आदेश दिए।
थाना बरहन में दर्ज केस के अनुसार, जामपुर निवासी जुगेंद्र सिंह ने तहरीर दी थी। आरोप लगाया था कि 14 मार्च 1999 को गांव का आरोपी नरेश उर्फ भूरा और पवन अपनी बाइक पर उनके भतीजे मुकेश को जलेसर में सिनेमा दिखाने की बोलकर अपने साथ ले गए थे। देर शाम नरेश उर्फ भूरा दूध लेने गांव आया। उन्होंने मुकेश के बारे में पूछा तो आरोपी ने बताया कि वह अपनी मौसी के गांव नगला झंडू चला गया है।
दो दिन तक लौटकर नहीं आने पर नगला झंडू पहुंचे तो वहां भी नहीं मिला। आसपास के क्षेत्र में तलाश का कोई फायदा नहीं हुआ। बाद में आरोपियों ने अंतर्देशीय पत्र भेज फिरौती की मांग की। पुलिस ने विवेचना के बाद बरहन के गांव जामपुर निवासी नरेश उर्फ भूरा, संजय, गांव दौलतपुर निवासी खेम करन, चक्रपाल, थाना अवागढ़ के नंद गढ़ी निवासी राम शंकर, देवी सिंह के अलावा दो महिलाओं सहित 9 अन्य आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर अपहृत युवक को ढूंढ़ लिया। तब पुलिस ने अभियुक्तों की शिनाख्त परेड नहीं कराई थी।