आगरा। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के फतेहाबाद विद्युत वितरण मंंडल में सामने आए टेंडर घोटाले में टेंडर पोर्टल ने अहम भूमिका निभाई। घोटाले के मुख्य आरोपी शिविर सहायक नीरज पाठक ने उच्चाधिकारियों को भेजे टेंडर दस्तावेजों में जमकर गड़बड़ी की। निविदा राशि से लेकर अनुमति लेने तक में खेल किया लेकिन पोर्टल में अपलोड जानकारी में बदलाव न होने की वजह से जब मिलान हुआ तो मामला पकड़ में आ गया।
साल 2023 में मैसर्स मां दुर्गा कंस्ट्रक्शन को मिले एक टेंडर के लिए मैसर्स चौहान इंटरप्राइजेज और मैसर्स सीडीआरएम प्राइवेट लिमिटेड ने भी आवेदन किया। शुरूआती जांच में पता चला है कि आरोपी ने इस टेंडर के आवेदन तो ई-टेंडर पोर्टल के जरिये मंगाए, लेकिन बिना सक्षम कमेटी से अनुमोदित कराए ही दस्तावेजों में हेरफेर कर 1.67 करोड़ का अनुबंध कर लिया। यही नहीं, कई टेंडरों को पोर्टल में निरस्त दिखाने के बाद भी करोड़ों के काम आवंटित करने के लिए फाइलें आगे बढ़ा दीं। उच्च स्तरीय कमेटी से जितनी राशि के टेंडर की अनुमति मिली, उससे ज्यादा के काम आवंटित किए गए। यह जानकारियां सामने आने के बाद ही विभाग ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने का फैसला लिया। इसी के साथ ही विभागीय जांच की भी तैयारी शुरू हो गई है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि अगले हफ्ते सभी को आरोप पत्र थमाकर जवाब तलब किया जाएगा। संतोषजनक जवाब न मिलने पर बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी।