आगरा। पुलिस हिरासत में राजू गुप्ता की मौत के मामले में उनके परिजन को 5 लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा। मानवाधिकार आयोग ने उनके नजदीकी रिश्तेदार की तलाश कर उन्हें मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।
मानवाधिकार आयोग ने 28 जनवरी को डीएम और पुलिस कमिश्नर को आदेश जारी कर चार सप्ताह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा था। निर्धारित समय में रिपोर्ट न देने पर पीएचआर अधिनियम 1993 की धारा 13 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में राजू की मां की मौत के बाद कोई रिश्तेदार नहीं होने की रिपोर्ट दी थी।
मामले में न्यायालय पहले ही पुलिस को दोषी ठहरा चुका है। दरोगा अनुज सिरोही को 10 वर्ष और शिकायतकर्ता अंशुल प्रताप सिंह को 7 वर्ष का कारावास की सजा सुनाई है। इस प्रकरण की जांच मानवाधिकार आयोग की संस्तुति पर सीआईडी को स्थानांतरित की गई थी। अधिवक्ता व मानवाधिकार कार्यकर्ता नरेश पारस ने आयोग में मामला दर्ज कराया था। आयोग ने प्रशासन को रिश्तेदारों की तलाश तेज करने के निर्देश दिए थे। राजू के मथुरा में रहने वाले चाचा अशोक कुमार अभी जीवित हैं।