पुलिस महकमे में अधिकारी तो पहले से हर साल अपनी संपत्ति का ब्योरा देते आए हैं लेकिन इस बार दरोगा और सिपाहियों तक से यह विवरण मांगा जा रहा है। उन्हें बताना है कि उनके पास कितना कैश है, कितनी जमीन है और कितने गहने, यह पूरा ब्योरा 31 मार्च तक जमा कराना है। यह आदेश बीजेपी सरकार आने के बाद जारी किया गया है। पहले सिर्फ अफसरों से ब्योरा लिया जा रहा था।
इसे लेकर महकमे में हड़कंप की स्थिति बताई जा रही है क्योंकि कई पुलिस वालों ने जमीन में मोटा पैसा लगा रखा है। उधर विभाग में चर्चा यह भी है कि दागी पुलिसकर्मियों की गोपनीय सूची भी बनाई जा रही है। इसे शासन को भेजा जाएगा। इन सभी पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। इनमें ऐसे पुलिसकर्मी चिह्नित किए जा रहे हैं जो जुआ और सट्टा कराने में शामिल रहे हैं। इनके अलावा ऐसे पुलिस वाले हैं जो रिश्वत लेने के आरोप में सस्पेंड या लाइन हाजिर किए गए। जमीन में पैसा लगाने वाले और माफियाओं से रिश्ते रखने वालों की भी सूची बन रही है। हालांकि अधिकारी इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं लेकिन महकमे में चर्चा जबरदस्त है। उधर संपत्ति का ब्योरा देने के लिए तो बाकायदा थानों पर फार्म भेजे गए हैं। इन्हें सिपाही, हेड कांस्टेबल, मुंशी, दरोगा और इंस्पेक्टर सभी को भरना है। कई पुलिसकर्मी तो इसे भरने में वकीलों की मदद ले रहे हैं। हालांकि अन्य महकमों में भी यह विवरण लिया जा रहा है।
रिश्तेदारों के नाम खरीद रखी है प्रोपर्टी
आगरा। शहर के सिकंदरा और यमुना पार इलाके में कई पुलिसकर्मियों ने प्रापर्टी में मोटा निवेश कर रखा है। कुछ ने अपने नाम से प्लॅाट लिए हैं। इन पर बैंक से लोन कराया है। लेकिन ज्यादातर ऐसे हैं जिन्होंने प्लाट और फ्लैट रिश्तेदारों के नाम करा रखे हैं। इसका पकड़ में आना आसान नहीं है।
तीन तक वाणिज्यकर कर्मियों को बतानी होगी संपत्ति
चेक पोस्ट से लेकर मलाईदार पोस्ट पर सालों से काबिज वाणिज्य कर अधिकारियों, कर्मचारियों को अपनी चल और अचल संपत्ति का ब्योरा शासन को देना होगा। तीन अप्रैल तक अधिकारियों, कर्मचारियों से पूरी संपत्ति का ब्योरा मांगा गया है। परिवार के सदस्यों के नाम पर किए गए निवेश की भी जानकारी देनी होगी।
मुख्य सचिव के निर्देश के बाद एडीशनल कमिश्नर सुनील कुमार राय ने निर्देश दिए हैं कि शासन द्वारा भेजे गए प्रारूप-1 पर अधिकारियों, कर्मचारियों को चल, अचल संपत्ति का विवरण देना होगा। जोनल एडीशनल कमिश्नर को यह मार्च अंत तक दिया जाएगा, जो अधीनस्थ अधिकारियों, कर्मचारियों के संपत्ति के ब्योरे को दो-दो प्रतियों में प्रारूप-2 के साथ मुख्यालय भेजेंगे। टैक्स अधिवक्ताओं और चार्टर्ड एकाउंटेंटों की मदद से ब्योरा तैयार कराया जा रहा है।
वहीं, कर्मचारियों की लेट-लतीफी पर भी अंकुश लगाया गया है। वाणिज्य कर के एडीशनल कमिश्नर प्रशासन अनूप कुमार ने एक अप्रैल से कर्मचारियों, अधिकारियों की हाजिरी के लिए बायोमेट्रिक्स प्रणाली लगाने का आदेश दिया है। बुधवार को बायोमेट्रिक्स प्रणाली के कुटेशन लखनऊ भेज दिए। मंजूरी के बाद जयपुर हाउस स्थित कार्यालय पर बायोमेट्रिक्स प्रणाली लगा दी जाएगी। एडीशनल कमिश्नर ग्रेड वन पीके सिंह ने बताया कि वर्तमान में 10:10 बजे हाजिरी रजिस्टर सील किया जा रहा है।