पिछले साल मंदिर में ताला लगवाया, अब पूजा-पाठ शुरू करवाई
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वही जगह। वही मंदिर। वही लोग। वही मौका। वही समस्या। लेकिन साल भर के भीतर ही समाधान करने का पुलिस का तरीका बिल्कुल ही बदल गया। सपा सरकार के दौरान जिन लोगों की एक न सुनी, योगी राज में सिर्फ उनकी ही सुनी गई। तब जिन साक्ष्यों को नजरअंदाज करके मंदिर पर ताला लगवा दिया गया, अब उन्हीं के आधार पर पूजा-पाठ शुरू करा दी गई। तब हिदायत दी गई थी कि अगर किसी ने मंदिर में घुसकर पूजा पाठ की कोशिश की, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अब चेतावनी दी गई है कि अगर बाहरी तत्वों ने आकर मंदिर में पूजा-पाठ में कोई व्यवधान किया, तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
सुबह पूजा-पाठ के लिए पहुंची महिला ओमवती, सावित्री, सुमन का कहना था कि पिछले चैत्र नवरात्र को पुलिस से खूब कहा था कि यह मंदिर प्राचीन है, यहां दशकों से पूजा होती चली आ रही है, तब पुलिस ने नहीं सुनी। लोहामंडी थाना की पुलिस ने शांति भंग में गिरफ्तार करने की चेतावनी देकर सभी को चुप कर दिया था। अब इसी थाना की पुलिस मंदिर के गेट पर तैनात की गई है ताकि पूजा-पाठ में कोई व्यवधान न पड़ने पाए। मंदिर का जो गेट तोड़ दिया गया था, उसे पुलिस ने रात में ही फिर से तैयार करवा दिया। पुलिस सूत्रों की मानें तो यह सब भाजपा नेताओं के सख्त रवैये के कारण हुआ है।
सोमवार रात मंदिर का गेट खोले जाने की कोशिश के दौरान पुलिस ने लाठियां बरसाई थी। इसमें दो महिलाएं घायल हो गई थी। भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी थी कि मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद अधिकारियों के सुर एकदम से बदल गए थे।
फोटो खींचने आए लोगों को खदेड़ा
आगरा। सुबह जब मंदिर में पूजा पाठ शुरू हुई तो पास की बस्ती के कई लोग पहुंच गए। उन्होंने कहा कुछ नहीं लेकिन पूजा पाठ के फोटो खींचने लगे। मोबाइल से रिकार्डिंग भी की जा रही थी। उनसे पुलिस ने पूछा कि वे कौन हैं, तो बोले पड़ोस की बस्ती से आए हैं। देख रहे हैं कि यहां पूजा पाठ कैसे शुरू करा दी गई। इस पर पुलिस ने उन्हें सख्ती के साथ वहां से खदेड़ दिया। पूजा पाठ में लगे लोग भी उन पर भड़क गए थे।
दोनों पक्षों की वार्ता कराई गई है। एक वर्ष पूर्व की तरह से मंदिर की व्यवस्था लागू कर दी गई है। शांति व्यवस्था के लिए पुलिस और मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं।
धर्मेंद्र सिंह, एडीएम सिटी