फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीईए लागू होने पर मरीजों के इलाज का खर्च दोगुना हो जाएगा

विज्ञापन
विज्ञापन
आगरा। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) आगरा ने द क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) के खिलाफ आंदोलन तेज कर दिया है। आगरा और अलीगढ़ मंडल के चिकित्सकों को लामबंद किया जा रहा है। रविवार को आवास विकास कॉलोनी स्थित होटल में आयोजित कार्यक्रम में आईएमए के अध्यक्ष डॉ. राजीव उपाध्याय ने कहा कि सीईए लागू होने पर मरीजों के इलाज का खर्च दोगुना हो जाएगा। यह खर्च मरीजों के सिर ही जाएगा। एक्ट जनता के खिलाफ है। एक्ट वापस नहीं लिया गया तो चिकित्सक संगठित होकर सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
विज्ञापन

आईएमए के अध्यक्ष निर्वाचित डॉ. ओपी यादव ने कहा कि यह एक्ट सरकार को आईएमए से विचार-विमर्श करने के बाद लागू करना चाहिए था, जो कि नहीं किया गया। विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार तक चिकित्सक अपनी आवाज पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। एक्शन कमेटी के अध्यक्ष डॉ. जेएन टंडन ने कहा कि सरकार ने सीईए को एक जनवरी, 2022 से लागू करने की घोषणा की है। यह स्वास्थ्य प्रणाली को पंगु बना देगा। अस्पतालों पर न्यूनतम मानक लादा जा रहा है। देश में 24 लाख नर्सों की कमी है। इतनी जल्दी यह कमी कैसे पूरी होगी।
डॉ. सुधीर धाकरे ने कहा कि आईएमए के विरोध की वजह से सीईए वर्ष 2010 से अब तक प्रदेश में लागू नहीं हो सका है। जबकि 11 राज्यों ने इसे लागू कर दिया है। यह प्रदेश की परिस्थितियों को देखते हुए व्यावहारिक नहीं है।
विज्ञापन

आईएमए के सचिव डॉ. अनूप दीक्षित, डॉ. शरद गुप्ता, आईएमए इटावा के सचिव डॉ. डीके सिंह ने भी एक्ट को जनता विरोधी बताया। डॉ. मनोज शर्मा, डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ, डॉ. मुनीश्वर गुप्ता, डॉ. हरेंद्र गुप्ता, आईएमए एटा के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष गुप्ता, आईएमए इटावा के अध्यक्ष डॉ. अमिताभ श्रीवास्तव, आईएमए मैनपुरी के अध्यक्ष डॉ. आरएस यादव, आईएमए फिरोजाबाद के अध्यक्ष डॉ. विनोद अग्रवाल, डॉ. जलज की उपस्थिति रही।
सेल्सा आगरा के अध्यक्ष डॉ. सुनील शर्मा ने कहा कि सरकार से मांग है कि वह वर्तमान अव्यावहारिक कानून को निरस्त करके, प्रदेश की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एक व्यावहारिक कानून बनाए। या फिर हरियाणा की तरह 50 बेड से नीचे के अस्पतालों व क्लीनिक पर इस कानून को लागू न किया जाए। छोटे अस्पताल और क्लीनिक जो मरीजों को सस्ता इलाज उनके नजदीक उपलब्ध करा रहे हैं, उन पर भी सीईए लागू किया जाता है तो निजी चिकित्सक हड़ताल पर चले जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें