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नोट बंदी से करोबार का कबाड़ा

Tue, 15 Nov 2016 11:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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नोटबंदी का असर
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आम लोगों की जीवनचर्या के साथ किसानों पर नोटबंदी का सबसे बुरा असर पड़ा है। बुवाई के समय खाद, बीज और कीटनाशकों के लिए उन्हें नोटों की किल्लत से जूझना पड़ रहा है तो वहीं फसल की सिंचाई के लिए जरूरी डीजल इंजन भी नहीं खरीद पा रहे। डीजल इंजन और जनरेटर के बड़े हब आगरा में नोट बंदी के बाद कारोबारी खून के आंसू रो रहे हैं। बिहार, बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड आदि राज्यों से मांग एकदम थम गई है। इससे डीजल इंजन और जनरेटर कारोबार को 800 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।

‘दो साल की मंदी के बाद डीजल इंजन की मांग शुरू हुई थी, लेकिन नोट बंदी के आकस्मिक फैसले से सप्ताह भर से कारोबार ठप पड़ा है। नोट संकट से यह सीजन अब खराब ही गुजरेगा। खरीदार बड़े नोट न होने से बाजार का रुख ही नहीं कर रहे। यह बड़ा झटका है’
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नरेंद्र सिंह, अध्यक्ष
यूपी डीजन इंजन एसोसिएशन

‘वैट का मासिक टैक्स जमा करने के लिए 20 तारीख तय है, लेकिन हमने वाणिज्य कर कमिश्नर से तारीख बढ़ाकर 30 नवंबर करने की मांग की है  बैंकों के मौजूदा हालात में वैट जमा करना मुश्किल है।’
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गागन दास रामानी
महामंत्री, आगरा व्यापार मंडल

घरेलू जूता बाजार से निकल सकता है 9 हजार करोड़
हींग की मंडी जूता मार्केट में हर दिन 3.50 लाख जोड़ी जूते का स्टॉक रहता है। देश के घरेलू जूता बाजार की 65 फीसदी जरूरतें आगरा ही पूरा करता है। घरेलू जूता कारोबार से जुड़े लोग अंडर बिलिंग और टैक्स चोरी के खेल से दिन दूनी, रात चौगुनी तरक्की करते रहे, लेकिन केंद्र सरकार के नोटबंदी के फरमान से हींग की मंडी जूता मार्केट की रकम सामने आने की उम्मीद है। बाजार के सूत्रों के मुताबिक करीब 9 हजार करोड़ रुपये आने वाले दिनों में बैंकों में जमा हो सकते हैं। 
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