बैंक से रकम निकलवाने को जिलाधिकारी के यहां गुहार लगा रहे लोग
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नई बस्ती निवासी फरतजहां का 21 नवंबर को निकाह है। मगर, वह अपनी शादी का जोड़ा पसंद करने की बजाय इन दिनों अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर काट रही है। पिता बीमार हैं और घर में इतनी भी रकम नहीं है कि बारातियों के स्वागत की तैयारी भी हो सके। ऐसा ही हाल गजेंद्र पाल सिंह का है। उनकी बेटी की बारात 30 नवंबर को आनी है। बैंक से लोन का चेक लिए बैंक से कलेक्ट्रेट और कलेक्ट्रेट से बैंक के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उन्हें भी शादी की तैयारियों के लिए पर्याप्त नई करेंसी नहीं मिल पा रही।
जिलाधिकारी कार्यालय पर इन दिनों सबसे ज्यादा 1000-500 के नोट बंद होने के बाद आए आर्थिक संकट से जूझ रहे वे फरियादी पहुुंच रहे हैं, जिनके यहां आने वाले दिनों में शादी समारोह है। डीएम से वे गुहार लगा रहे हैं कि कैसे भी हो, बैंक से उन्हें इतनी धनराशि तो दिलाई जाए जिससे कि वे मेहमानों और बारातियों का स्वागत कर सकें। फरतजहां इन्हीं में से एक है। आर्थिक तंगी से जूझ रही फरत का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काला धन बाहर निकालने को यह कदम उचित है लेकिन उन्हें हम जैसे लोगों की समस्या का भी समाधान करना चाहिए। उसके पिता की तबीयत खराब होने की वजह से बैंक की लाइन में नहीं लग सकते।
घर में भी ऐसा कोई नहीं है जो निकाह के लिए रकम का बंदोबस्त कर सके। इसी वजह से फरत को खुद अपने निकाह की तैयारियों के लिए पर्याप्त मात्रा में नये नोटों का इंतजाम करने के लिए घर से निकलना पड़ा है। गजेंद्र पाल सिंह का भी ऐसा ही कुछ कहना है। उन्होंने बेटी की शादी के लिए बैंक से तीन लाख का लोन लिया था। पिछले दिनों लोन मंजूर हो गया और बैंक ने उन्हें तीन लाख रुपये का चेक थमा दिया। अब उनके समस्या खड़ी हो गई है कि वे इतनी रकम को कैश कैसे करें। बैंक से सिर्फ सप्ताह में 24 हजार रुपये ही निकाल सकते हैं। ऐसे में वे अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। मंगलवार को कई और ऐसी युवतियां डीएम कार्यालय पहुंचीं, जिनकी हाल ही में शादी होनी हैं। मगर, बहुत सी युवतियां शादी में कोई अड़चन न आ जाए इसके डर से अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहतीं। लेकिन इनमें से किसी की भी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। ये लोग बैंक और अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं।