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अरावली का सीना कर दिया छलनी: आगरा-भरतपुर सीमा पर 9 साल बाद होगा सर्वे, खनन पर फिर सख्ती

Wed, 31 Dec 2025 12:41 PM IST
आगरा ब्यूरो अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

सुप्रीम कोर्ट ने नए आदेश में 100 मीटर से कम ऊंची पहाड़ियों से खनन पर रोक को बरकरार रखा है। फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में अरावली पर्वतमाला की छोटी पहाड़ियां अवैध खनन से मैदान में तब्दील हो चुकी हैं।
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अरावली की पहाड़ियों पर खनन
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विस्तार
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आगरा और भरतपुर की सीमा पर अरावली की पहाड़ियों का नौ साल बाद सर्वे होगा। लाल बलुआ पत्थर के खनन से पहाड़ का सीना छलनी हो चुका है। पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) में संरक्षित इन पहाड़ियों का 2016 में आखिरी बार सर्वे हुआ था।
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सुप्रीम कोर्ट ने नए आदेश में 100 मीटर से कम ऊंची पहाड़ियों से खनन पर रोक को बरकरार रखा है। फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में अरावली पर्वतमाला की छोटी पहाड़ियां अवैध खनन से मैदान में तब्दील हो चुकी हैं। यहां रॉक पेंटिग्स व अन्य प्राचीन विरासतों का अस्तित्व नष्ट हो रहा है। खेरागढ़ और जगनेर में कुल्हाड़ा, बंधौली, जगाहेपुर, सरेंधी, कछपुरा व उभरानी गांव में पहाड़ियां हैं।

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रोक के बाद भी यहां चोरी-छिपे अवैध खनन की शिकायतें होती रही हैं। जिलाधिकारी अरविंद एम बंगारी ने आगरा की सीमा में पहाड़ के सीमांकन के लिए सोमवार को एडीएम के नेतृत्व में टीम भेजी थी। एडीएम वित्त एवं राजस्व शुभांगी शुक्ला ने बताया कि आगरा की सीमा क्षेत्र में पहाड़ियों का सीमांकन कराया जाएगा। गाटा संख्यावार गांव चिह्नित किए जाएंगे। 2016 में आखिरी बार पहाड़ की पैमाइश की गई थी। सीमांकन के लिए भरतपुर के जिलाधिकारी को पत्र भेजा है। आगरा और भरतपुर की संयुक्त टीम मुड्डियां लगाएगी।
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लाल पत्थर के खनन पर प्रतिबंध
आगरा की सीमा में लाल पत्थर के खनन पर प्रतिबंध है। जगनेर, तांतपुर, सीकरी व अन्य क्षेत्रों में पहले खनन होता था। अवैध खनन से यहां कई पहाड़ी नष्ट हो चुकी हैं। पर्यावरणविद जगन प्रसाद का कहना है कि यह पहाड़ियां आगरा की जलवायु और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन्हें संरक्षित करने के लिए शासन स्तर से एक विशेष टास्क फोर्स का गठन होना चाहिए।
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