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Agra News: 125 साल पुराना माता चामुंडा मंदिर, श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र

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फोटो02अनेक पाल,पुजारी। संवाद
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कासगंज। सर्कुलर रोड स्थित 125 साल पुराना माता चामुंडा मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर तरौरा वाली माता के नाम से प्रसिद्ध है। इसकी विशेषता पीपल की जड़ से प्रकट हुए माता के चरण हैं। नवरात्रि के दौरान यहां भव्य मेले का आयोजन होता है। अष्टमी और नवमी पर विशेष पूजन के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है।
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मंदिर का इतिहास काफी रोचक और आस्था से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि तरौरा क्षेत्र के एक बाग में पीपल के पेड़ की जड़ में माता चामुंडा के चरण प्रकट हुए थे। इसके बाद वर्ष 1901 में एक छोटे मंदिर की स्थापना की गई। समय के साथ भक्तों की संख्या बढ़ती गई और मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैलने लगी। भक्तों की आस्था और सहयोग से यह मंदिर धीरे-धीरे भव्य स्वरूप में विकसित हो गया। मंदिर परिसर में विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं। प्रत्येक सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां शीश झुकाते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं।
ऐसे पहुंचें मंदिर
माता का यह मंदिर सर्कुलर रोड पर इस्माइलपुर रोड और अशोक नगर के मध्य स्थित है। बस स्टैंड से मंदिर की दूरी आधा किलोमीटर है। रेलवे स्टेशन से मंदिर लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर है। शहर के लोग बिलराम गेट चौराहा, गली माता चामुंडा मंदिर और सोरों गेट अंबेडकर तिराहा जैसे मार्गों से होकर यहां पहुंचते हैं।
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वर्जन
माता चामुंडा मंदिर के दरबार से कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटता है। सच्चे मन से मांगी गई मन्नत अवश्य पूरी होती है। नवरात्र के दिनों में दूर दराज के क्षेत्र से भक्त आकर माता रानी की पूजा करते हैं। यह मंदिर क्षेत्र में गहरी धार्मिक भावना का प्रतीक है। अनेक पाल सिंह- पुजारी
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