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Railway: अब 'कवच' से सुरक्षित होगी आगरा रेल मंडल की ट्रेन, रेल कार्यालय में दिया गया प्रस्तुतीकरण

Sat, 11 Jun 2022 01:55 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

यात्री रेल हो या फिर मालगाड़ी ट्रेन के संचालन में जरा सी चूक होते ही भयंकर हादसा होता है। इससे जानमाल की हानि होती है। हादसे रोकने के लिए रेलवे ने स्वचालित सुरक्षा प्रणाली तैयार की है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Istock
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विस्तार
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अब आगरा रेल मंडल के मथुरा-पलवल खंड में चल रहीं ट्रेन तथा उनमें मौजूद रेल यात्रियों को भी भारतीय रेल का नया सुरक्षा कवच हासिल हो सकेगा। सभी ट्रेनों को ट्रेन कोलिजन सुरक्षा प्रणाली से लैस किया जाएगा। रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेटिफिकेशन (आरएफएआई) उपकरणों से युक्त ट्रेनें हादसों से बच सकेंगी। अपने ही देश की सर्वोत्तम सुरक्षा प्रणाली से रेल मंडल की ट्रेनों को लैस करने के लिए दो दिन पूर्व आगरा मंडल के रेल अधिकारियों ने मंथन किया तथा संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए।

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यात्री रेल हो या फिर मालगाड़ी ट्रेन के संचालन में जरा सी चूक होते ही भयंकर हादसा होता है। इससे जानमाल की हानि होती है। इस प्रकार के हादसों को रोकने के लिए रेलवे ने सुरक्षा प्रणाली तैयार की है। इलेक्ट्रानिक उपकरणों और रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेटिंफिकेशन उपकरणों से लैस सिस्टम को लोकोमोटिव तथा सिग्नल सिस्टम के साथ-साथ पटरियों में भी स्थापित किया जाता है। 

इस तकनीक से रुकेंगे ट्रेन हादसे 

जिसके बाद तेज गति से आती हुई ट्रेन भी यदि एक दूसरे के नजदीक आएंगी तो यह सिस्टम ट्रेन के चालकों को तो सतर्क करेगा ही साथ ही खुद ही ट्रेन को रोक देगा। इससे ट्रेन हादसे होने की संभावना कम होगी। बृहस्पतिवार को मंडल रेल कार्यालय में मथुरा-पलवल के बीच स्थापित होने वाले आरएफआई सिस्टम का प्रस्तुतीकरण संकेत एवं रेल संचार विभाग तथा ओईएम कंपनी एचबीएल द्वारा किया गया। इस दौरान मंडल रेल प्रबंधक आनंद स्वरूप सहित मथुरा के रेल अधिकारी भी मौजूद रहे।

क्या है कवच सुरक्षा प्रणाली

ट्रेन कोलिजन अवॉइडेंस सिस्टम (टीसएएस) के नाम से जाने जानी वाली सुरक्षा प्रणाली को रेलवे ने कवच नाम दिया गया है। इसके तहत लोकोमोटिव तथा सिग्नलिंग सिस्टम के साथ-साथ रेल पटरियों के बीच इस प्रकार का रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेटिफिकेशन उपकरणों का सेट स्थापित किया जाता है कि यदि ट्रेन एक दूसरे से निर्धारित दूरी पर एक ही रेल लाइन पर होती हैं तो पहले रेडियो फ्रीक्वेंसी के माध्यम से वह चालकों को सतर्क करेगा बाद में वह ऑटोमेटिक तरीके से पास-पास रहने वाली ट्रेनों को रोक देगा।

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