बढ़ते कैंसर और इससे होने वाली मौत से चिकित्सक चिंतित हैं। इसे रोकने के लिए एसएन मेडिकल कॉलेज और नई दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डीएनए की जांच कर अब कैंसर के जीन की खोज करेंगे। इससे समय पर इलाज होने से मरीजों की जान बच सकेगी।
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कैंसर के मरीज इलाज के लिए स्टेज 3 या 4 पर आते हैं। तब डॉक्टरों के पास जान बचाने के अवसर कम होते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए एसएन में डीएनए की जांच के लिए बायोकेमिस्ट्री विभाग में 60 लाख रुपये से मॉलीक्यूलर लैब स्थापित की जा रही है। ज्यादातर उपकरण आ गए हैं। यहां संभावित मरीजों की डीएनए की जांच कर कैंसर का पता लगा लिया जाएगा।
शुरू में ब्लड कैंसर के मरीजों की डीएनए जांच करेंगे, इसके बाद मुख का कैंसर, स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर समेत अन्य कैंसर के जीन की खोज की जाएगी। इसमें लोगों के डीएनए, पीसीआर एंड नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग, प्राइमर डिजाइनिंग समेत अन्य के जरिए कारक तलाशे जाएंगे। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि दोनों मेडिकल कॉलेज के बीच समझौते पर बात हुई है। डीएनए से कैंसर के जीन की पता चलने पर मरीज का समय पर इलाज हो सकेगा। जून में प्रोजेक्ट शुरू हो जाएगा।
जांच बेहद महंगी, आगरा में नहीं होती
एसएन के बायोकेमिस्ट्री विभागाध्यक्ष डॉ. कामना सिंह ने बताया कि विभाग में कैंसर के जीन की जांच की सुविधा भी शुरू होगी। यह जांच बेहद महंगी है और आगरा में नहीं होती। निजी लैब वाले भी इसकी जांच के लिए नमूना दिल्ली भेजते हैं। यह जांच 10 हजार रुपये से अधिक की होती है। अब यहां चिकित्सक और टेक्नीशियन की टीम को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
जल्द पता चले तो बचे जान
एसएन कॉलेज के कैंसर रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुरभि गुप्ता ने बताया कि ओपीडी में हर महीने 15 से अधिक नए मरीज आते हैं। इसमें 25 से 45 साल के 40 फीसदी मरीज होते हैं। अभी 66 मरीजों की रेडियोथेरेपी चल रही है। मर्ज का जल्द पता चले तो जान बचे। सबसे ज्यादा मुख, स्तन, सर्वाइकल व रक्त का कैंसर के मरीज होते हैं। तीसरे-चौथे स्टेज में आते हैं। शोध होने और कैंसर के जीन की जांच होने से मरीजों में पूर्व ही बीमारी की पता चल सकेगी। इलाज तो होगा ही मौतों को रोका भी जा सकेगा।