नवागत कुलपति डा. अरविंद दीक्षित ने मंगलवार देर रात कुलपति आवास में कार्यभार ग्रहण किया। उन्होंने बताया कि उनका पहला लक्ष्य परीक्षा की व्यवस्था को पटरी पर लाना है। समाचार पत्रों में पढ़कर लगा कि इस विश्वविद्यालय में परीक्षा प्रणाली बेपटरी है।
डा. दीक्षित ने बताया कि परीक्षा व्यवस्था दुरुस्त नहीं होगी तो समय से न परिणाम जारी नहीं किए जा सकेंगे और न ही प्रवेश प्रक्रिया समय पर हो पाएगी। इनके नियमित होने के बाद ही शिक्षण व्यवस्था में एक्सीलेंसी की बात की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि परीक्षा कराने का लंबा अनुभव रहा है। माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का सदस्य रहते हुए परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए अभिनव प्रयोग किए गए और वह सफल भी रहे।
अटेंडेंस सीट पर सबसे पहले माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने ही अभ्यर्थियों के फोटो लगाने शुरू किए। परीक्षा परिणाम आनलाइन करने के साथ पारदर्शिता लाने का कार्य किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में उनकी दूसरी प्राथमिक शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार लाना रहेगी। यहां शैक्षणिक गुणवत्ता भी ठीक न होने की जानकारी मिली है। बता दें कि विश्वविद्यालय के निवर्तमान कुलपति प्रो. मोहम्मद मुजम्मिल का कार्यकाल दो बार बढ़ाया गया। पहली बार तीन और दूसरी बार एक माह के लिए। तीन दिसंबर को दीक्षांत समारोह के दिन ही उनका कार्यकाल एक माह के लिए बढ़ाया गया था।
ये होंगी चुनौतियां
- चार लाख हजार डिग्रियां लंबित।
- 60 हजार मार्कशीट की त्रुटियों को दूर करना।
- बंद पड़े करीब 23 कोर्स को शुरू कराना।
- फर्जी मार्कशीट बनाने के कॉकस को तोड़ना।
- समय पर प्रवेश और वार्षिक परीक्षा कराना।
- 180 दिन की कक्षाएं संचालित कराना।
- शैक्षणिक सत्र में करीब 17 करोड़ रुपये की बकाया फीस वसूल करना।
- बीएड फर्जीवाड़े प्रकरण के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई।