काला धन छुपाने और टैक्स बचाने के लिए बेनामी संपत्ति खरीदने वालों के लिए आने वाला वक्त टेंशन लेकर आ सकता है। ऐसा लग रहा है कि मोदी सरकार नोट बंदी के बाद ऐसे लोगों पर भी शिकंजा कस सकती है जिन्होंने अनाप शनाप बेनामी संपत्ति बनाई है।
मोदी सरकार मई 2015 में बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधित बिल-2015 लोकसभा में पेश कर चुकी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले साल 13 मई को बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधित बिल-2015 लोकसभा में पेश किया था। बाद में विचार के लिए इसको वित्त संबंधी संसदीय स्थाई समिति के पास भेज दिया गया था। इसने 28 अप्रैल को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद लोकसभा ने 27 जुलाई, राज्यसभा ने दो अगस्त को संशोधित बिल को पास कर दिया। सरकार ने पहली बार बेनामी ट्रांजेक्शन कानून 1988 में बनाया था। संशोधित कानून के तहत बेनामी संपत्ति को जब्त करने तथा प्रबंधन के लिए प्रशासक की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है। हजार और पांच सौ के नोट बंदी के बाद शहर के जिन लोगों ने काला धन प्रापर्टी खरीदने में खपाया है उनकी टेंशन बढ़ गई है।
क्या होती है बेनामी संपत्ति
कानून के जानकारों के मुताबिक बेनामी संपत्ति वो होती है जो अपने पैसे से खरीदी जाती है लेकिन दूसरों के नाम पर। ये कानून को धोखा देने का तरीका है। इसका कोई आंकड़ा नहीं है कि बेनामी सौदों से कितना काला धन लगा है।
विधेयक में संशोधन से यह होगा लाभ
- संशोधन की बदौलत इनकम डिस्क्लोजर स्कीम में घोषणा करने वालों को प्रस्तावित कानून से राहत मिलेगी
- संशोधन के जरिए कानूनी व प्रशासकीय प्रक्रियाओं को भी मजबूत करने की कोशिश
- प्रस्तावित विधेयक का मकसद बेनामी लेन-देन पर रोक
- नए कानून की बदौलत सरकार बेनामी संपत्ति कर सकेगी जब्त