फर्जी आधार कार्ड और फर्जी निवास प्रमाणपत्र लेकर आए युवक खुद को बता तो रहे थे कासगंज का निवासी जबकि सैन्य अफसरों को उनकी बोली लग रही थी मेरठ की तरफ की। इसी से उन पर शक हुआ। सूचना पुलिस को दी गई।
पुलिस ने उनसे कासगंज के मोहल्ले पूछे तो बगलें झांकने लगे। इसके बाद सख्ती से पूछताछ हुई तो फर्जीवाड़े की कहानी बयां कर दी। कहने लगे, हमारी तरफ के जिलों की भर्ती नहीं हो रही थी, इसलिए कासगंज के दस्तावेज बनवा लिए।
एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि मेरठ और कासंगज की बोली में थोड़ा सा फर्क है। पकड़े गए अभ्यर्थी मेरठ के आसपास के जिलों हापुड़, गौतमबुद्धनगर और बुलंदशहर के हैं। इनकी बोली से ही सैन्य अफसरों को शक हुआ। उनसे सूचना मिली तो पुलिस को लगाया गया।
पुलिस टीम ने पाया कि शक बिल्कुल सही है, इनकी बोली कासगंज की नहीं लग रही है। पहले दो को पकड़ा गया। उन्होंने पूछताछ में आठ और के नाम बताए। इस तरह दस की जानकारी मिल गई।
सैन्य अफसरों से बात की गई तो पता चला कि लवकुश, हितेश कुमार, सचिन, रोहित कुमार, विनीत, गौरव, सनी, प्रदीप कुमार ने फिजीकल टेस्ट पास कर लिया था। ये चरित्र प्रमाणपत्र और अन्य के सत्यापन का कार्य करा रहे थे। जयप्रकाश फिजिकल टेस्ट पास नहीं कर पाया। कुलदीप तेवतिया की भर्ती मंगलवार को होनी थी।
एसएसपी ने कहा कि सेना भर्ती में जालसाजों के सक्रिय होने की आशंका पर पुलिस और आर्मी इंटेलीजेंस की टीम सक्रिय है। इसलिए युवाओं से अपील है कि वह फर्जीवाड़े से भर्ती में शामिल न हों। उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
ये हुई बरामदगी
- फर्जी दस्तावेज, 11 आधार कार्ड, दो एडमिट कार्ड।
- आठ निवास प्रमाणपत्र, छह शपथ पत्र, छह जाति प्रमाणपत्र, तीन अविवाहित प्रमाणपत्र आदि।
- फर्जी आधार कार्ड, जाति प्रमाणपत्र, मूल निवास प्रमाणपत्र, कोविड -19 जांच रिपोर्ट, दो लैपटॉप, कलर प्रिंटर, दो एडेप्टर सहित प्रमाणपत्र।