अमेरिका से आईं अनिता कपूर ने कहा कि अमेरिका में हिंदी की स्थिति बहुत अच्छी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लोग प्रभावित हैं। स्थानीय लोग भी नमस्ते का संबोधन करते हैं। वह भारतीय जीवनशैली को समझने के लिए हिंदी सीखना भी चाहते हैं। समापन समारोह की अध्यक्षता कुलपति प्रो. आशु रानी ने की। मुख्य अतिथि अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति प्रो. खेमसिंह डहेरिया रहे। संगोष्ठी के संयोजक प्रो. प्रदीप श्रीधर को सम्मानित किया गया।
'हिंदी का वैश्विक परिदृश्य' पर अकादमिक सत्र आयोजित हुआ। अध्यक्ष इंदौर के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. बनवारी लाल जाजोदिया और अतिथि आगरा कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अनुराग शुल्क रहे। 'वैश्विक स्तर पर हिंदी के प्रचार-प्रसार में प्रवासी साहित्यकारों की भूमिका' विषय पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता प्रो. हरिमोहन ने की। मुख्य वक्त्ता अमेरिका की साहित्यकार अनिल प्रभा कुमार ने ऑनलाइन विचार व्यक्त किए। 'प्रवासी भारतीय समाज और हिंदी' विषय पर सत्र की अध्यक्षता प्रवासी भारतीय साहित्य विशेषज्ञ प्रो. विमलेश कांति वर्मा ने की।
'हिंदी के विकास में संलग्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं' विषय पर सत्र की अध्यक्षता पद्मश्री व वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. उषा यादव ने किया। डॉ. नीलम यादव, डॉ. रणजीत भारती, डॉ पल्लवी आर्य, डॉ. केशव शर्मा, डॉ. अमित कुमार, डॉ. शालिनी श्रीवास्तव, डॉ. राजेंद्र दवे, डॉ. वर्षा रानी, डॉ. प्रदीप वर्मा, डॉ. रमा, मोहिनी दयाल आदि का सहयोग रहा। समापन सत्र का संचालन डॉ. नितिन सेठी ने किया।
पंडित बनारसीदास चतुर्वेदी को याद किया
आगरा कॉलेज की प्रो. शेफाली चतुर्वेदी ने प्रवासी पीड़ा के सजग चितेरे पद्मभूषण पं. बनारसीदास चतुर्वेदी को याद किया। बताया कि कैसे पंडितजी ने फिजी में बसे भारतीय मजदूर प्रवासियों की आर्थिक एवं सामाजिक समस्याओं पर सरकार का ध्यान केंद्रित कराया।
विदेशों में हिंदी साहित्य पसंद
गदर टू, ओम माई गॉड में अभिनय कर चुकी आर्या शर्मा भी संगोष्ठी में शामिल हुईं। उन्होंने बताया कि विदेशों में हिंदी साहित्य को पसंद किया जाता है। नए विषयों पर आ रही कहानियों को लोग पसंद कर रहे हैं।