मैनपुरी। फर्जी शिक्षक भर्ती मामले में डीएम के निर्देश के बाद शनिवार को कलक्ट्रेट सभागार में जिला समिति की बैठक हुई। इसमें माह के अंत तक फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त करने की सहमति बनी है। वहीं, अब अंतिम बार डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय को पत्र लिखकर फर्जी अंकपत्र के बारे में जानकारी मांगी गई है। इस संबंध में विवि को सोमवार को पत्र भी भेज दिया गया है।
वर्ष 2017 में प्रदेश सरकार ने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से वर्ष 2004-05 में जारी बीएड की डिग्रियों की जांच कराने के निर्देश दिए थे। जांच के दौरान पाया गया कि बड़ी संख्या में लोगों ने डॉ. आंबेडकर विश्वविद्यालय के नाम से बीएड की फर्जी प्रमाणपत्र हासिल कर लिए।
एसआईटी जांच में पाया गया कि 50 हजार से अधिक बीएड डिग्री धारकों के अंकपत्रों में हेराफेरी कर फर्जी अंकपत्र जारी किए गए। इसमें पांच हजार से अधिक ऐसे लोग हैं, जिन्होंने बीएड के फर्जी अंकपत्र के माध्यम से शिक्षा विभाग में नौकरी हासिल कर ली।
एसआईटी ने जांच में मैनपुरी के 80 शिक्षकों को बीएड के फर्जी अंकपत्र के सहारे नौकरी करने का आरोपी पाया। इनकी सूची नवंबर 2018 में बीएसए को भेजी गई थी, लेकिन दो बार नोटिस जारी होने के बाद अभी तक इन शिक्षकों की बर्खास्तगी नहीं हो पा रही थी।
जिलाधिकारी के निर्देश पर आयोजित जिला समिति की बैठक में अंतिम बार विश्वविद्यालय को पत्र लिखकर फर्जी अंकपत्र के बारे में जानकारी मांगने का निर्णय लिया गया। एक सप्ताह में जवाब नहीं मिलने पर शिक्षकों की बर्खास्तगी कर दी जाएगी।