कासगंज। प्रत्येक परिषदीय विद्यालय में एसएमसी (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) की ग्रांट हर साल दी जाती है। मार्च माह में विभाग से ग्रांट मिली है। एक ही बैंक का लेनदेन के लिए निर्धारण किया गया है। बैंक में पीपीए (प्रिंट पेमेंट एडवाइस) दाखिल नहीं हो पा रहे हैं। जिससे ग्रांट में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। परेशान शिक्षक चक्कर काटने को मजबूर हैं। वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर ग्रांट की वापसी की आशंका बनी हुई है।
जिले में 1263 परिषदीय विद्यालय स्थित है इनमें स्कूल मैनेजमेंट कमेटी बन गई है विद्यालय की देखरेख एवं विकास के लिए हर साल विभिन्न मदों में विभाग द्वारा धनराशि ग्रांट के रूप में जारी की जाती है। पिछले दो वर्षों से यह ग्रांट मार्च के माह में जारी हो रही है। जिससे वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले शिक्षकों को इस ग्रांट को अपने खातों में पहुंचने के लिए बैंकों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। विभाग की साइट पीएमएस (पब्लिक फाइनेंसियल मैनेजमेंट सिस्टम) से प्रिंट पेमेंट एडवाइस लोड करना पड़ता है। इसके बाद बैंक में दाखिल करने के बाद ही इसका भुगतान विद्यालय के खाते में पहुंचता है।
विभाग ने बैंक आफ बडौदा ही इसके लिए अधिकृत की है। जिले में मात्र तीन शाखाएं हैं, स्टाफ भी काम है। इसके चलते भी शिक्षक परेशान हो रहे हैं। इस मामले को लेकर बीते दिनों पटियाली क्षेत्र के गांव ककराला में तैनात एक शिक्षिका और बैंक के कर्मचारियों के बीच विवाद भी हुआ था जिसमें शिक्षिका ने बैंक कर्मियों पर अभद्रता का आरोप लगाया। उसने बैंक के अधिकारियों को ट्वीट भी किया। वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर है अभी सभी विद्यालयों पर ग्रांट नहीं पहुंच पाई है। शिक्षकों को आशंका है कि वित्तीय वर्ष समाप्ति पर ग्रांट वापस हो सकती है।
संगठनों ने की थी अन्य बैंकों से भुगतान की मांग
परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के विभिन्न संगठनों पूर्व में कई बार ज्ञापन देकर विभाग से बैंक ॉफ बड़ौदा के साथ अन्य बैंकों को विकल्प के रूप में चुनने की मांग की थी। जिससे शिक्षकों को हो रही परेशानी से निजात मिल सके और एसएमसी की ग्रांट विधिवत रूप से संबंधित विद्यालयों के खाते में पहुंच सके।
मार्च से पहले भेजी जाए ग्रांट
शिक्षकों का मानना है कि विभाग मार्च माह में ग्रांट भेजता है। ग्रांट प्राप्ति की प्रक्रिया में समय लगता है जब तक प्रक्रिया पूर्ण होती है, वित्तीय वर्ष समाप्ति के समय आ जाता है। विभिन्न शिक्षकों शैक्षिक संगठन लगातार सितंबर से नवंबर माह के मध्य ग्रांट जारी करने की मांग कर रहे हैं।
यह प्रक्रिया शासन स्तर से जारी है। शिक्षकों को परेशानी हो रही है। इसकी जानकारी प्रदेश स्तर को दी गई है। समस्या का जल्द ही समाधान होने की संभावना है। - राजीव कुमार, बीएसए