फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्षय रोग पर अंकुश नहीं, 20 दिन में तीन की मौत

विज्ञापन
जिला अस्पताल स्थित क्षय रोग वार्ड। - फोटो : MAINPURI
विज्ञापन
मैनपुरी। क्षयरोग लाइलाज बीमारी नहीं है। सरकार करोड़ों रुपये क्षयरोग से पीड़ित मरीजों के इलाज पर खर्च कर रही है। फिर भी क्षय रोग से पीड़ित मरीजों की मौत हो रही है। जिला अस्पताल में बीस दिन में टीबी से तीन मरीजों की मौत हो चुकी है। क्षयरोग के मरीजों के लिए जिला अस्पताल में अलग से अस्पताल और वार्ड की व्यवस्था की गई है। वार्ड में गंदगी और अव्यवस्थाओं के कारण यहां भर्ती मरीज दिन के समय खुले में पेड़ के नीचे आकर लेट जाते हैं। अस्पताल में भर्ती मरीज रविंद्र, मोहित व उर्मिला मंगलवार को क्षयरोग वार्ड के सामने पोस्टमार्टम हाउस को जाने वाली सड़क पर पेड़ के नीचे लेटे हुए थे। उनके तीमारदार से जब बात की गई तो उनका कहना था कि वार्ड के अंदर इतनी गंदगी है कि अंदर लेट पाना मुश्किल है।
विज्ञापन

नियमित उपचार नहीं लेने का तर्क दे रहा विभाग
बेवर विकास खंड के गांव टिकुरी निवासी विश्राम सिंह का पुत्र बेंचेलाल(50) क्षय रोग से पीड़ित थे। 31 मई 2019 को जिला अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि मरीज ने नियमित उपचार नहीं लिया।
जिम्मेदारी से बच रहा विभाग
भोगांव थाना क्षेत्र के गांव आदिमपुर निवासी जसराम सिंह (65) क्षयरोग से पीड़ित थे। उनका जिला अस्पताल में उपचार चल रहा था। यहां उपचार के दौरान 15 जून 2019 को उनकी मौत हो गई। यहां भी विभाग ने नियमित उपचार न लेने का तर्क दिया, लेकिन अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। क्षय रोगी को नियमित इलाज मुहैया कराना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है।
विज्ञापन

बीच में इलाज छोड़ने के कारण से मौत होने की बात कह रहा विभाग
भोगांव थाना क्षेत्र के गांव बनहार निवासी जमादार सिंह के पुत्र रामसरन(50) क्षयरोग से पीड़ित थे। परिजन उनका जिला अस्पताल में उपचार करा रहे थे। इस दौरान 17 जून को रामसरन की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने बीच में इलाज छोड़ने की बात कही, लेकिन उसकी जिम्मेदारी हैं कि ऐसे मरीजों को चिह्नित करके उन्हें नियमित उपचार देना भी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें