आगरा में भूगर्भ जल प्रबंधन के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में टास्क फोर्स बनी, लेकिन भूजल की बर्बादी नहीं रुकी। अवैध बोरिंग पर तीन साल में न कोई एफआईआर दर्ज हुई, न ही जुर्माना वसूला गया। ये स्थिति तब है जब बिना पंजीकरण बोरिंग कराने पर जिले में रोक है। जिले में 12 ब्लॉक व शहरी क्षेत्र डार्क जोन घोषित है।
भूजल का अंधाधुंध दोहन रोकने के लिए 2019 में भूगर्भ जल अधिनियम पारित हुआ। भूजल के व्यावसायिक उपयोग को नियंत्रित करने व कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में टास्क फोर्स बनी। मुख्य विकास अधिकारी इसके सचिव हैं। भूगर्भ जल नोडल विभाग हैं। तीन साल में टास्क फोर्स ने महज 6 आरओ प्लांट पर कार्रवाई की। जिले में 2500 से अधिक अवैध आरओ प्लांट संचालित हैं। बिना पंजीकरण बोरिंग पर 2.50 लाख रुपये तक जुर्माना, एफआईआर पर 6 महीने तक सजा का एक्ट में प्रावधान है, लेकिन एक्ट कागजों तक सीमित है। सर्विस सेंटर, होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा के अलावा डेयरी, वाटर पार्क, स्वीमिंग पूल, कारखाने, हॉस्पिटल में बिना एनओसी भूजल दोहन हो रहा है।
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शहर में यमुना का पानी पीने लायक नहीं। ऐसे में तीन हजार करोड़ रुपये से बुलंदशहर से गंगाजल लाकर शहर की प्यास बुझाने की कवायद पिछले 20 साल से चल रही है। उधर, ग्रामीण क्षेत्रों में भूगर्भ जल संकट के कारण जल जीवन मिशन दम तोड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अपर गंगा कैनाल से फिरोजाबाद के रास्ते गंगाजल लाने की योजना है। इधर भूजल रिचार्ज, संरक्षण एवं प्रबंधन के इंतजाम कागजों में धूल फांक रहे हैं।
कराया जा रहा सर्वे
मुख्य विकास अधिकारी ए मनिकन्डन ने बताया कि अवैध बोरिंग, बिना एनओसी भूजल दोहन का सर्वे कराया जा रहा है। अवैध भूजल दोहन पर 2.50 लाख रुपये जुर्माना व 6 माह से एक साल तक सजा का प्रावधान है।