राधास्वामी सत्संग सभा, दयालबाग ने स्वामीबाग के सीएसी के खिलाफ सभी मुकदमों को वापस लेने के लिए प्रार्थना पत्र दिए
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राधास्वामी मत के संस्थापक परम पुरुष पूरनधनी हुजूर स्वामीजी महाराज की 200 वीं जयंती से पहले दयालबाग और स्वामीबाग के अनुयायियों के दिलों के बीच की दूरियां कम हो सकती हैं। राधास्वामी सत्संग सभा, दयालबाग ने स्वामीबाग की सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव काउंसिल और राधास्वामी ट्रस्ट के खिलाफ कोर्ट में चल रहे सभी कानूनी मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया है। सभी मुकदमों में दयालबाग प्रबंधन की ओर से कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया जा चुका है। अमर उजाला ने अप्रैल में ही राधास्वामी मत के दोनों केंद्रों के बीच इस सद्भावना भरे कदम की जानकारी दे दी थी।
राधास्वामी सत्संग सभा, दयालबाग के सचिव जीपी सत्संगी नेमुरार घोषणापत्र के मुताबिक सोमवार को बयान जारी करके कहा है कि ‘राधास्वामी मत के सभी केंद्रों में पारस्परिक मैत्रियता एवं सद्भावनापूर्ण संबंध बने रहें और इन केंद्रों से जुड़े व्यक्तियों में भाईचारे की भावना रहे, इसलिए राधास्वामी सत्संग सभा दयालबाग ने पारस्परिक सद्भावना उत्पन्न करने के लिए सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव काउंसिल और राधास्वामी ट्रस्ट स्वामीबाग के खिलाफ न्यायालयों में दर्ज सभी कानूनी मामलों को वापस लेने का निर्णय किया है। इसके लिए उपयुक्त न्यायालयों में प्रार्थना पत्र दाखिल कर दिया गया है’।
राधास्वामी सत्संग सभा के मीडिया प्रभारी एस के नैयर ने बताया कि मत के संस्थापक की 200 वीं जयंती धूमधाम से मने, इसलिए दिलों के फासले मिटाने की पहल की है।
जन्माष्टमी 2018 में मनेगी गुरूजी की 200 वीं जयंती
आगरा। प्रथम आचार्य पूरनधनी हुजूर स्वामीजी महाराज का जन्म 1818 को हुआ था। साल 2018 में उनकी 200वीं जयंती राधास्वामी मत के सभी शाखाओं के अनुयायी मनाएंगे। जन्माष्टमी पर 2018 में 15 दिन तक द्विशताब्दी समारोह स्वामीबाग स्थित पवित्र समाधि पर मनाया जाएगा। उससे पहले पवित्र स्वामीबाग समाधि को भी पूरा करने का काम चल रहा है। दयालबाग और स्वमीबाग के बीच आधा दर्जन मामले बड़ी अदालतों में हैं। बीते सालों में दयालबाग के गुरू महाराज स्वामीबाग समाधि पर दो बार मत्था टेकने जा चुके हैं और यह उनकी ही पहल है, जिसके बाद सभी मुकदमों को वापस लेने के लिए प्रार्थना पत्र दिए जा रहे हैं। हालांकि इस मामले में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव काउंसिल स्वामीबाग का पक्ष सामने नहीं आ पाया है। समाधि में सत्संग के लिए प्रवेश पर स्वामीबाग के अनुयायियों को आपत्ति है, जिसे दूर करने की कोशिश आठ महीनों से चल रही है।