ताजमहल पर सबसे पहले 1966 में प्रवेश टिकट लगाया गया। तब 20 पैसे का टिकट था। उद्देश्य सैलानियों की संख्या जानना था। तीन साल बाद 1969 में टिकट के दाम 50 पैसे कर दिए गए। मौजूदा रॉयल गेट पर एक ही टिकट काउंटर से टिकट मिलती थी और वाहनों की पार्किंग फोरकोर्ट के अंदर ही होती थी।
एएसआई की कमाई होते देख आगरा विकास प्राधिकरण ने स्मारकों पर पथकर लगा दिया। एएसआई ने 50 पैसे की टिकट रखी थी तो एडीए 1.50 रु. वसूलने लगा।
इसके बाद 1993 में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय दो-दो घंटे के लिए अलग से 100 रुपये का टिकट लगाया गया। इसके बाद ही ताज दोनों विभागों के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी की तरह से हो गया। तभी से लगातार टिकट दरों में बढ़ोतरी की जा रही है।
इस साल शुरू हुआ देशी-विदेशी में फर्क
ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
साल 2000 से पहले ताज में विदेशी भी भारतीयों के समान टिकट पर प्रवेश करते थे। एडीए ने विदेशी पर्यटकों पर एक जनवरी, 2000 से 500 रुपये का पथकर लगाया।
एएसआई ने 470 रुपये की टिकट विदेशियों के लिए शुरू कर दी, इससे विदेशी पर्यटकों के लिए ताज का टिकट 970 रुपये का हो गया।
वर्ष 2001 में पर्यटन संस्थाओं ने अदालत का दरवाजा खटखटाया तो एएसआई ने टिकट कम करके 470 की जगह 250 रु. कर दी। दो साल पहले एएसआई ने टिकट बढ़ाकर 500 का कर दिया और अब 600 रुपये का प्रस्ताव है।
ऐसे बढ़ता रहा टिकट का दाम
वर्ष एएसआई एडीए कुल टिकट दर
1966 20 पैसे - 20 पैसे
1969 50 पैसे - 50 पैसे
1976 50 पैसे 1.50 2 रु.
1993 सुबह 6-8 तथा शाम को 5-7 तक 100 रुपये
1995 50 पैसे 10 10.50 रुपये
1996 5 रुपये 10 15 रुपये
2000
देशी 5 रु. 10 15
विदेशी 5 रु. 500 505
28-10-2000
देशी 10 10 20
विदेशी 470 500 970
2001
विदेशी 250 500 750
देशी 10 10 20
2016
विदेशी 500 500 1000
भारतीय 30 10 40