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Taj Mahal: ताज 17 साल पहले चुना गया था सातवां अजूबा, नंबर एक पर मिली थी जगह

Sun, 07 Jul 2024 09:23 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज डेस्क, आगरा

सार

 7 जुलाई 2007 को न्यू सेवन वंडर्स की घोषणा हुई थी। जिसमें ताजमहल को दुनिया का सातवां अजूबा चुना गया। साथ ही पहला स्थान भी दिया गया। 
 
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तत्कालीन मेयर अंजुला सिंह माहौर को यह सम्मान सौंपा गया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 तारीख थी 07-07-07 यानी सात जुलाई 2007। विदेशी फाउंडेशन ने दुनिया के नए सात अजूबों की इस दिन घोषणा की थी। ताजमहल को दुनिया के सात अजूबों में नंबर 1 की जगह दी गई। 17 साल पहले पुर्तगाल में सात जुलाई को आगरा की तत्कालीन मेयर अंजुला सिंह माहौर को यह सम्मान सौंपा गया था, जिसे ताजमहल में फिर बाद में आगरा नगर निगम के पालीवाल पार्क म्यूजियम में रखा गया।
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दुनियाभर के 200 स्मारकाें के बीच सात अजूबों को चुनने के लिए तब मोबाइल फोन से एसएमएस के जरिए वोटिंग की गई थी। इसमें ताजमहल नंबर 1 पर रहा था। इन अजूबों को यूनेस्को ने आधिकारिक तौर पर मंजूरी नहीं दी, लेकिन 17 साल पहले ताजमहल इस वजह से दुनिया भर में चर्चाओं में बना रहा। इसका बड़ा असर ताजमहल आने वाले सैलानियों पर पड़ा। दो साल के अंदर ही ताज पर पर्यटकों की संख्या दोगुनी हो गई थी।

ये आया बदलाव
17 साल पहले न्यू सेवन वंडर्स की घोषणा तक ताजमहल में 18 लाख तक सैलानी आते थे, लेकिन घोषणा के बाद पर्यटकों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ। खासकर विदेशी सैलानियों की संख्या 10 साल के अंदर ही 8 लाख से ज्यादा और भारतीय सैलानियों की संख्या 80 लाख से ज्यादा हो गई। अब ताज पर एक करोड़ से ज्यादा भारतीय और 10 लाख से ज्यादा विदेशी पर्यटक पहुंच रहे हैं। साल 2020 में कोरोना के बाद फिर से ताज पर सैलानियों की बड़ी संख्या पहुंच रही है।
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संसाधन उतना नहीं बढ़ा
टूरिज्म गिल्ड के  अध्यक्ष राजीव सक्सेना ने बताया कि सेवन वंडर्स में ताज को चुने हुए 17 साल हो गए। इस दौरान जितना संसाधन पर्यटकों के लिए बढ़ना चाहिए थे, उतना नहीं बढ़ा। पर्यटक तो बढ़े, पर उसके मुताबिक ताज और आसपास बुनियादी सुविधाएं नहीं बढ़ सकीं।

रॉयल गेट पर रखनी चाहिए ट्रॉफी
होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश चौहान ने कहा कि  सेवन वंडर्स की ट्रॉफी ताजमहल के रॉयल गेट वाली जगह रखनी चाहिए जिससे पर्यटक ताज में प्रवेश करते ही इसे देख सकें। नए अजूबे ही सही, नई पीढ़ी को इसकी जानकारी तो मिलेगी।


शुल्क बढ़ने पर भी नहीं घटे सैलानी
साल 2007 में ताजमहल के सात अजूबों में चुने जाने के बाद जिस तरह भीड़ उमड़ी, उसके बाद ताज पर भीड़ नियंत्रण के लिए मुख्य गुंबद पर 200 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगा दिया गया। ताजमहल में प्रवेश शुल्क में बढ़ोतरी की गई, लेकिन इससे सैलानियों की संख्या कम नहीं हुई। स्टेप टिकटिंग के उद्देश्य से मुख्य गुंबद पर 200 रुपये का शुल्क लगने से मकबरे में शाहजहां मुमताज की कब्र देखने जाने वाले 15 फीसदी तक रह गए, पर ताज में प्रवेश करने वाले बढ़ रहे हैं। ताज में इससे पहले असली कब्रों, चारों मीनारों में ऊपर जाने पर रोक लगाई जा चुकी है। ताज में शाहजहां के उर्स के तीन दिन ही केवल असली कब्रों को देखने के लिए प्रवेश किया जा सकता है।
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