ताजमहल की सुरक्षा में जब दीवार से सटकर लगाए गए पेड़ खतरा बन गए तो एक नई दीवार बनाई जा रही है। ताजमहल की सुरक्षा के लिए गठित कमेटी की सिफारिश के बाद एएसआई ने पूर्वी गेट पर लेबर गेट से दशहरा घाट तक सात फु ट ऊंचाई की दीवार बनानी शुरू की है, जो 450 मीटर लंबी होगी और इस पर लोहे की नुकीली ग्रिल लगाई जा रही है। ताज की पुरानी सुरक्षा दीवार से इसे तीन मीटर आगे लगाकर बनाया गया है।
पूर्वी गेट पर लेबर गेट से आगे लगे ऊंचे-ऊंचे पेड़ ताज की सुरक्षा में खतरा बन रहे हैं। रेड जोन की सुरक्षा संभाल रही सीआईएसएफ ने जब सुरक्षा का यह मामला एडीजी सुरक्षा के दौरों में उठाया तो तय हुआ कि नई सुरक्षा दीवार बनाई जाए, जिससे कोई भी दीवार और पेड़ों पर चढ़ने का प्रयास न कर सके। एएसआई ने 90 लाख रुपये की लागत से दीवार बनाने का काम शुरू किया है। ताज के पूर्वी गेट से दशहरा घाट तक दीवार के किनारे कभी ककैया ईंटों का खरंजा बना हुआ था, जिस पर एडीए ने पेड़ लगवा दिए। पुरानी सुरक्षा दीवार और ताज की दीवार के बीच खरंजे के अवशेष अब भी दिखाई देते हैं। एएसआई नई सुरक्षा दीवार के साथ पुरानी दीवार को भी संरक्षित कर रहा है। नई दीवार साढ़े तीन फुट ऊंची होगी, जिस पर इतनी ही ऊंची नुकीली ग्रिल लगाई जाएगी।
एएसआई अधीक्षण पुरातत्वविद डा. भुवन विक्रम ने बताया कि पुराने खरंजे को संरक्षित करने के साथ पुरानी सुरक्षा दीवार को भी ठीक किया जा रहा है। पेड़ों के कारण दूसरी दीवार को बनाया जा रहा है। पेड़ों की छंटाई के लिए भी अनुमति मांगी गई है।