शाहजहां और मुमताज की मोहब्बत के शाहकार ताजमहल की खूबसूरती की पूरी दुनिया मुरीद है लेकिन उसी के शहर में कोई सड़क ऐसी नहीं जहां कूड़े के ढेर न लगे हों। बदबू की वजह से लोग मुंह पर रुमाल रखकर गुजरते हैं। सरकारें आती हैं, शहर के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणा करती हैं नया नाम देती हैं लेकिन बुनियादी जरूरतों पर किसी का ध्यान नहीं है।
समाजवादी पार्टी सरकार में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आगरा पर खूब प्यार लुटाया। हर तीन महीने में आगरा की विजिट की, बड़ी-बड़ी बातें हुईं। ताजगंज प्रोजेक्ट बना, साइकिल ट्रैक बना, इनर रिंग रोड बना लेकिन सफाई पर कोई काम नहीं हुआ। पेयजल पर कुछ नहीं हुआ।
पीएम नरेंद्र मोदी की स्मार्ट सिटी योजना के दूसरे चरण में आगरा का चयन हुआ लेकिन अभी तक कोई काम नहीं हुआ। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में सफाई के लिए खास नहीं होने वाला है। अब मुख्यमंत्री योगी की सरकार मॉडल सिटी बनाने के ख्वाब दिखा रही है लेकिन शहर की सफाई व्यवस्था दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है।
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बिन राजा की फौज बना निगम
नगर निगम के हालात इस वक्त बहुत खराब हैं। नगर आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह का तबादला कर उन्हें शामली का जिलाधिकारी बना दिया गया। अपर नगर आयुक्त का पद खाली है। उप नगर आयुक्त के दो पद हैं वे भी कई महीनों से खाली हैं। एक उप नगर आयुक्त (अनिल कुमार) थे तो उनको तबादला कर ईओ शिकोहाबाद बना दिया गया। उन्हें भी रिलीव कर दिया गया है। कोई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद नहीं है। इसकी वजह से न तो नीतिगत निर्णय हो पा रहे हैं और ना ही वित्तीय। कर्मचारियों पर कोई अंकुश नहीं है। निगम के कर्मचारी अब बिन राजा की फौज बन गए हैं।
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हेल्थ मैन्युअल के मुताबिक चाहिए 6000 सफाईकर्मी
नगर निगम के कर्मचारी नेता श्याम कुमार करुणेश का कहना है कि हेल्थ मैन्युअल के मुताबिक, प्रति 10 हजार की आबादी पर 28 सफाई कर्मचारियों की भर्ती होनी चाहिए। आगरा शहर की आबादी करीब 20 लाख है। इस हिसाब से करीब 6000 सफाई कर्मचारियों की आवश्यकता है। वर्तमान में निगम में करीब 2600 कर्मचारी हैं। इनमें करीब 700 कर्मचारी संविदा पर हैं। किसी भी सरकार ने सफाई व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया है।
इस संबंध में पिछले दिनों मैं नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना था मिला था। शहर की समस्याओं से उन्हें अवगत कराया था। भाजपा सरकार शहर की सफाई व्यवस्था जल्द ही विस्तृत योजना तैयार कर रही है।
इंद्रजीत आर्य, मेयर