केस पहला: पिछले दिनों अमेरिकी पर्यटक को सुरक्षाकर्मियों ने स्मारक के अंदर योग करने के आरोप में स्मारक से बाहर कर दिया। इस पर उसने कड़ी आपत्ति जताई थी।
केस दूसरा: सात अक्टूबर को पतंजलि, हरिद्वार के बच्चे ताज देखने आए थे। उन्होंने पश्चिमी गेट के बाहर गायत्री मंत्र का उच्चारण करने पर पुलिस ने रोक दिया।
ये तो मात्र दो उदाहरण हैं। इससे पहले तमाम पर्यटकों को विश्वदाय स्मारक ताजमहल में परेशानी का करना पड़ा है। विभागों की लापरवाही की वजह से अंजान पर्यटकों को अपराधी जैसा व्यवहार झेलना पड़ा है। इससे ताज की छवि धूमिल हो रही है।
स्मारक के अंदर पट्टिका पर ये तो लिखा है कि यहां धार्मिक पुस्तक, सामग्री, झंडा, बैनर प्रतिबंधित है लेकिन योग करना, एक-दूसरे को उपहार देना, ध्यान लगाकर बैठना, केसरिया वस्त्र धारण करके प्रवेश करना, मंत्रों का उच्चारण करना प्रतिबंधि है, ऐसा कहीं उल्लेख नहीं है।
न ही स्मारक के अंदर और ही पार्किंग स्थल पर। जबकि इन्हीं आरोपों में कई बार पर्यटकों को परेशानी झेलनी पड़ी है। वेबसाइट पर भी कोई जानकारी नहीं है।
ताज के अंदर हमें क्या करना है और क्या नहीं, इसके बारे में पूरी जानकारी कही नहीं है। जोकि बेहद जरूरी है। नहीं तो हमें कैसे पता चलेगा कि यहां योग आदि नहीं कर सकते। क्रिस्टीना, अमेरिका
ताज के साये में तमाम पर्यटक अपने हिसाब से समय बिताना चाहते हैं। ऐसे में यदि कोई ध्यान लगाकर बैठता है तो उसे योगा समझकर स्मारक से बाहर कर दिया जाता है, ये गलत है। आजार, एनआरआई
जो पर्यटक गाइड के साथ नहीं आते, उन्हें जानकारी नहीं हो पाती कि उन्हें स्मारक में क्या प्रतिबंधित है, क्या नहीं। ऐसे में उन्हें कभी-कभी बेवजह परेशान होना पड़ता है। इससे शहर की छवि धूमिल होती है। सुमित उपाध्याय, टूर आपरेटर
धार्मिक पुस्तक, सामग्री आदि वस्तुएं स्मारक के अंदर ले जाने के संबंध में निर्देश अंकित हैं। योगा नहीं कर सकते या स्मारक के सामने अंगूठी या फिर कुछ अन्य वस्तु गिफ्ट नहीं कर सकते, इस संबंध में फिलहाल कोई दिशा-निर्देश नहीं लगे हैं। जल्द प्रयास किए जाएंगे। वसंत कुमार स्वर्णकार, अधीक्षण पुरातत्वविद