रजिस्ट्री दफ्तर में भूमाफिया, कातिब व विभागीयकर्मियों की मिलीभगत से जमीन पर कब्जे का खेल चलता रहा। रिकॉर्ड रूम से मूल बैनामा गायब हो गए। जिल्द बही से पन्ने फट गए। भूमाफिया के आगे सिस्टम लाचार रहा और सिक्कों की खनक से अफसर भी खामोश बने हैं।
आगरा सदर तहसील के रिकॉर्ड रूम में हुए फर्जीवाड़े के बाद निबंधन विभाग में खलबली मची है। जिन सात बैनामों का रिकार्ड गायब हैं, उन्हे लेकर अब विभाग एफआईआर दर्ज कराने जा रहा है। लेकिन, इस लापरवाही पर कई सवाल भी खड़े हो गए हैं। सदर तहसील स्थित रजिस्ट्री दफ्तर में पांच सब रजिस्ट्रार हैं। जिनके यहां जमीनों की खरीद-फरोख्त दस्तावेज पंजीकृत होते हैं। फिर इन्हें रिकॉर्ड रूम में रखा जाता है। रिकॉर्ड से पन्ने फाड़ने, मूल बैनामा गायब कर उनकी जगह फर्जी एग्रीमेंट व अन्य दस्तावेज लग गए।
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इस खेल में सदर तहसील के कातिब और रिकॉर्डरूम कर्मियों का हाथ बताया जा रहा है। सहायक महानिरीक्षक स्टांप एसके सिंह ने बताया कि विभागीय कमेटी की जांच में कई दस्तावेज संदिग्ध मिले हैं। जिन लोगों ने पन्ने फाड़े, रिकॉर्ड से छेड़छाड़ व चोरी की उनकी पहचान नहीं हो सकी है। मुकदमा दर्ज कराने के लिए पुलिस आयुक्त को पत्र भेजा जाएगा।
फॉरेंसिक व पुलिस जांच में ही फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड का खुलासा हो सकेगा। उधर, सदर पुलिस ने बिल्डर अजय सिंह सिसौदिया को पिछले दिनों फर्जी बैनामा के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। एक अन्य व्यक्ति प्रशांत को भी पुलिस जेल भेज चुकी है। इस गैंग में 20 से अधिक लोग शामिल हैं। जिनमें एक भाजपा नेता का नाम भी बताया जा रहा है। ऐसे में पुलिस जांच में कई नए खुलासे हो सकते हैं।