वृंदावन प्रवास के दौरान रमणरेती मार्ग स्थित हांडाकुटी में पत्रकारों से वार्ता कर रहे जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि आसाराम और रामरहीम गृहस्थ थे, संत नहीं।
आसाराम और रामरहीम को पैदा करने वाले लोग हमारे बीच के हैं, जो चमत्कार को देखकर किसी को संत मान लेते हैं। यह लोग संतों की मान मर्यादा को धूमिल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आसाराम के कर्मों की सजा तो बहुत पहले मिल जानी चाहिए थी। महिला या बच्ची के साथ दुष्कर्म करना महापाप है।
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि आज की शिक्षा में रामायण, महाभारत और गीता का समावेश नहीं है। भारत के अध्यात्म को शिक्षा से अलग कर दिया है। यही कारण है कि आज दुष्कर्म जैसी घटनाएं हो रहीं हैं। यदि बच्चों को दुर्गा सप्तशती का ज्ञान शिक्षा के माध्यम से कराया जाता तो वे समझते कि कन्या क्या होती है।
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि भारत जब से धर्म निरपेक्ष हुआ है उसका दुष्परिणाम हिंदू ही झेल रहा है। सारा का सारा अन्याय हिंदुओं के हिस्से आ रहा है। मंदिर अधिग्रहण के प्रश्न पर कहा कि कोई साधुओं को बेईमान बता रहा है तो कोई ब्राह्मणों को। मंदिरों के अधिग्रहण से धर्म का नाश होगा, सांसारिक व्यक्ति कभी भी मंदिरों का संचालन कर ही नहीं सकता।