राजामंडी स्थित आर्य समाज मंदिर में स्वामी श्रद्धानंद के 99वें बलिदान दिवस पर आयोजित कर्यक्रम मे
आगरा। राजा की मंडी स्थित आर्य समाज मंदिर में शनिवार को स्वामी श्रद्धानंद का 99वां बलिदान दिवस मनाया गया। समारोह में मुख्य वैदिक प्रवक्ता डॉ. आयुषी राणा भारती ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद ने सामाजिक उत्थान और आंदोलन के साथ ही धर्म और देश के लिए अपना बलिदान दिया। उन्होंने मार्ग से भटके लोगों को पुनः स्वधर्म में लाने के लिए शुद्धि आंदोलन का सूत्रपात किया। कुछ सांप्रदायिक लोग उनसे नाराज हो गए और 23 दिसंबर 1926 को गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई। स्वामी श्रद्धानंद ने अंग्रेजों के समक्ष सिर उठाकर देश सेवा, त्याग व दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। उन्होंने यह प्रमाणित कर दिखाया कि मानव जन्म से नहीं, बल्कि कर्मों से महान बनता है।
भजन उपदेशक संदीप आर्य गिल ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद ने शिक्षा और समाज सुधार को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा और वैदिक मूल्यों पर आधारित आधुनिक भारत के निर्माण का मार्ग दिखाया। स्वामी श्रद्धानंद ने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। उन्होंने अपने भजन स्वामी श्रद्धानंद प्यारा है.., जब उसका कोई रूप नहीं है किसको भोग लगाऊं.., आर्यों के हो तुम हो प्राण ऋषि दयानंद... आदि भजनों से आर्यजनों को भाव विभोर कर दिया।
इससे पहले आचार्य सोमप्रकाश दीक्षित के सानिध्य में 11 कुंडीय यज्ञ संपन्न किया गया। मंत्री राजीव दीक्षित ने बताया कि सोमवार को पुन: 11 कुंडीय यज्ञ, सत्संग और भजनों का आयोजन होगा। आर्य समाज में अपना योगदान देने वालों को आर्य सम्मान से अलंकृत किया जाएगा। संचालन वीरेंद्र आर्य ने किया। इस मौके पर प्रधान देव प्रकाश शर्मा, कोषाध्यक्ष डॉ. संजय कमठानिया, व्यवस्थापक आनंद शर्मा, विजय पाल सिंह चौहान, विजय अग्रवाल, सुधाकर गुप्त, सीए मनोज खुराना, वीरेंद्र कनवर, रामनिवास भारद्वाज, अनुज आर्य, नीलम दीक्षित, नमिता शर्मा, राशि गुप्ता आदि मौजूद रहे।