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UP: जिनको बताया संदिग्ध, वो निकले मेयर-पार्षदों के रिश्तेदार, बैकफुट पर नगर निगम; वापस ली तहरीर

Thu, 26 Mar 2026 10:21 PM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

आगरा नगर निगम में सदन की कार्यवाही के दाैरान संदिग्धों के प्रवेश के मामले में तहरीर दी गई थी। अब निगम अधिकारी बैकफुट पर आ गए हैं। जिन्हें संदिग्ध बताया गया था, वह मेयर ओर पार्षदों के रिश्तेदार निकले। 
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आगरा नगर निगम
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विस्तार
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आगरा के नगर निगम सदन में संदिग्धों के प्रवेश के मामले में नगर निगम के सहायक अभियंता ने थाने में दी गई तहरीर वापस ले ली है। बृहस्पतिवार को निगम की ओर से संदिग्ध बताए गए भाजपा कार्यकर्ता और पार्षद, मेयर के रिश्तेदार सामने आए और खुद को संदिग्ध घोषित करने पर आपत्ति जताई। उनकी आपत्ति के बाद शाम को निगम ने यू टर्न ले लिया।
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सदन की बैठक में संदिग्धों के प्रवेश के मामले में नगर निगम ने तहरीर देने के साथ ही सीसीटीवी फुटेज जारी किया था। इस फुटेज में जो लोग थे, उन्होंने निगम की तहरीर पर आपत्ति जताई है। बृहस्पतिवार को मेयर के भतीजे और प्रतिनिधि हर्ष दिवाकर के साथ छह कार्यकर्ताओं ने इस पर आपत्ति जताई। हर्ष दिवाकर ने कहा कि वह पार्षद पुत्र, मेयर के भतीजे और भाजपा कार्यकर्ता हैं। नगर निगम में जनता के काम के लिए जाते हैं। नगर निगम के अधिकारी उन्हें संदिग्ध घोषित कर रहे हैं। इससे उनके मान-सम्मान को ठेस पहुंची है। भाजपा पार्षद के बेटे अपूर्व शर्मा ने कहा कि उन लोगों को बदनाम करने की साजिश रची गई है। पार्षद के बेटे गोगा मौर्य ने कहा कि वह भाजयुमो के महानगर उपाध्यक्ष हैं। वह संदिग्ध नहीं, बल्कि भाजपा कार्यकर्ता हैं। निगम अधिकारी गलत माहौल बना रहे हैं। इसी तरह अमर डागौर, मनोज चौहान आदि ने कहा कि अधिकारी आते-जाते रहेंगे, लेकिन जनप्रतिनिधि जनता के काम के लिए निगम जाएंगे। उनके पास हथियार नहीं थे, फिर संदिग्ध क्यों बताया गया।

सदन में पार्षदों के परिजन के प्रवेश पर रोक
नगर निगम में मेयर हेमलता दिवाकर और नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल के बीच उपजे विवाद के बाद अब सदन और बैठकों में पार्षदों के रिश्तेदारों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। नगर निगम सचिवालय ने शासनादेश का हवाला देते हुए कहा है कि ऐसा होने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। सचिवालय ने कहा कि महिला जनप्रतिनिधियों के नाम पर उनके पति और रिश्तेदारों की दखलअंदाजी नहीं होनी चाहिए। बैठकों में केवल निर्वाचित और पदेन सदस्य ही शामिल होंगे। शासन तक शिकायतें पहुंच रहीं है कि पदाधिकारियों के स्थान पर उनके संबंधी न केवल बैठकों में भाग ले रहे हैं, बल्कि सरकारी निर्णयों को भी प्रभावित कर रहे हैं। शासन ने इसे पूरी तरह अवैध करार दिया है। नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने बताया कि निगम सचिवालय ने पार्षदों, मेयर के रिश्तेदारों के गोपनीय फाइलों को देखने पर भी रोक लगाई है। यदि किसी को रिकॉर्ड देखना है, तो उसे नगर आयुक्त या अधिशासी अधिकारी को विधिवत आवेदन देना होगा। सक्षम अधिकारी से लिखित स्वीकृति मिलने के बाद ही फाइलें दिखाई जा सकेंगी।
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