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Agra News: हजारों विदेशी मेहमानों से गुलजार हुआ सूरसरोवर

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सूरसरोवर में पहुंचे पक्षी
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आगरा। रुनकता स्थित सूरसरोवर पक्षी विहार कीठम झील में सर्द हवाओं के साथ एक बार फिर प्रकृति का अनोखा उत्सव लौट आया है। दूर देश से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर आए प्रवासी पक्षियों ने झील को चहचहाहट, रंगीन पंखों और सुरीली आवाज से सराबोर कर दिया है। सुबह सुबह आसमान में उड़ते परिंदों की कतारें, पानी में तैरते झुंड और पेलिकन के समूह द्वारा मछलियों का सामूहिक शिकार इन नजारों ने झील के दृश्य मनमोहक कर दिया है।
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इस वर्ष परिंदों में झील पर रोजी पेलिकन, डालमेशन पेलिकन पेंटेड स्टॉक, डार्टर, नर्थन सोबलर, विश्लिंग टील, कॉम डक, पलाश गुल्स, ब्लैक-नेक स्टॉक ग्रे हॉर्न, सारस क्रेन, बार-हेडेड गूज जैसे मेहमान पहुंच चुके हैं। वन विभाग के अनुसार, पर्यटकों की पसंदीदा प्रजाति फ्लेमिंगो राजहंस भी अगले कुछ दिनों में झील पर उतरना शुरू कर देंगे और सर्दियों के अंत तक यहीं डटे रहेंगे। फ्लेमिंगो हर वर्ष सबसे आखिर में आते हैं और सबसे आखिरी में लौटते हैं।
इन दिनों सबसे अधिक चर्चा में रोज़ी पेलिकन डालमेशन पेलिकन हैं, जो बड़े झुंड बनाकर मछलियों को घेरते और अपनी चोंच से शिकार करते नजर आ रहे हैं। वहीं बार-हेडेड गूज, जिन्हें दुनिया की सबसे ऊंची उड़ान भरने वाली प्रजाति माना जाता है, झील के टापुओं पर घास और जलीय पौधों की तलाश में शांत वातावरण का आनंद लेते देखे जा रहे हैं।
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वन क्षेत्राधिकारी अंकित यादव ने बताया कि प्रवासी पक्षियों का आगमन तेजी से बढ़ रहा है। पक्षियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, झील क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है। शोरगुल को रोकने के लिए तेज आवाज वाले वाहनों, लाउड म्यूजिक और हॉर्न पर रोक है। पर्यटकों को पक्षियों को देखने की अनुमति केवल टाॅवर एक से है, जबकि टाॅवर नंबर 2, 3 और 4 को शांति बनाए रखने के उद्देश्य से बंद रखा गया है।
प्रवासी पक्षियों के लिए प्राकृतिक भोजन बढ़ाने हेतु सिंचाई विभाग द्वारा झील का जलस्तर कम किया जा रहा है। पानी कम होने पर झील के भीतर उभरने वाले टापू निकल आते हैं। उनके आराम और भोजन का मुख्य आधार बनते हैं। इन टापुओं पर घास, कीट पतंगे, जलीय पौधे और मछलियां अधिक मात्रा में मिलती हैं, जिससे हजारों परिंदों का बड़ा समूह बिना परेशानी के ठहर पाता है। झील के पानी की नियमित जांच केंद्रीय जल आयोग और प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा की जा रही है।

वन विभाग साप्ताहिक प्रजाति गणना भी शुरू कर रहा है। हर साल कीठम झील में 90 से 100 प्रजातियों के पक्षी दर्ज किए जाते हैं, जिनमें 20 से 25 प्रजातियां विदेशों से प्रवास करती हैं। पिछले वर्ष झील में 25 से 30 हजार विदेशी पंछी आए थे।


रोजी पेलिकन : यह दुनिया के सबसे बड़े समुद्री पक्षियों में शामिल, मोटी चोंच और गले में पीली नारंगी थैली की वजह से आसानी से पहचाने जाते हैं। वयस्कों का चमकदार सफेद रंग और युवाओं का भूरा होता है। डालमेशन पेलिकन यह पेलिकन परिवार का सबसे विशाल सदस्य है। पंखों का फैलाव 3 मीटर से भी ज्यादा होता है। इसके पंखों के सिरे काले होते हैं।
ओरीयटंल डाटर (स्नेक बर्ड) : यह वह पंछी है जिसे लोग सांप वाला पक्षी भी कहते हैं, क्योंकि यह पानी में आधा शरीर डुबोकर तैरता है और केवल लंबी गर्दन और सिर दिखाई देते हैं। इसका पंख जलरोधक नहीं होता, इसलिए शिकार के बाद यह धूप में पंख फैलाकर सुखाता हुआ अक्सर दिख जाता है।
बार-हेडेड गूज : यह दुनिया के सबसे ऊंची उड़ान भरने वाले पक्षियों में से एक है। यह हिमालय की चोटियों के ऊपर से उड़ान भरते हुए भारत पहुंचता है।
फ्लेमिंगो (राजहंस) : कीठम झील का सबसे आकर्षक, सबसे फोटोजेनिक और सबसे लोकप्रिय पक्षी है। फिलहाल फ्लेमिंगो क्षील में पहुंचना शुरू नहीं हुए हैं, पर्यटकों इंतजार है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक 1,2 दिन में बड़ी संख्या में फ्लेमिंगो राजहंस का आगमन शुरू होने वाला है।

सूरसरोवर में पहुंचे पक्षी

सूरसरोवर में पहुंचे पक्षी

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सूरसरोवर में पहुंचे पक्षी

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