ताज नेचर वॉक में किए गए मिट्टी खनन मामले में पर्यावरणविद डाॅ. शरद गुप्ता की एनजीटी में दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई टल गई। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी। यमुना नदी का डूब क्षेत्र निर्धारण करने के लिए केंद्रीय जल आयोग ने एनजीटी में शपथपत्र दाखिल किया है, जिसमें कहा है कि नदी में 100 सालों में आई बाढ़ का अध्ययन आठ दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।
केंद्रीय जल आयोग ने कहा है कि असगरपुर से इटावा तक और शाहपुर से प्रयागराज के बीच दो हिस्सों में यमुना नदी के डूब क्षेत्र का निर्धारण किया जाएगा। इसमें नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच), गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग (जीएफसीसी), राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी), उत्तर प्रदेश सरकार, डीओडब्ल्यूआर, आरडी एंड जीआर और केंद्रीय जल आयोग के अधिकारियों के प्रतिनिधियों के साथ 100 साल में आई बाढ़ का अध्ययन किया जाएगा।
इन दोनों स्ट्रेच में 5, 25 और 100 साल में आई बाढ़ के दौरान प्रभावित हिस्सों का अध्ययन किया जाएगा। 1056 किमी लंबी यमुना नदी के इन हिस्सों के अध्ययन के लिए सेटेलाइट इमेज की मदद ली जाएगी। आयोग की रिपोर्ट में बाढ़ के दौरान हर जिले का जलप्लावन क्षेत्र तैयार किया गया है। आयोग ने 30 सालों की बाढ़ के आधार पर प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की है। 8 दिसंबर तक पेश की जाने वाली रिपोर्ट में बाढ़ के पैटर्न के बारे में भी बताया जाएगा।