आगरा। थाना एत्माद्दौला में अप्रैल 2022 में दर्ज हुई हत्या के प्रयास और आयुध अधिनियम की प्राथमिकी के दो मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने के बाद एडीजे-5 मृदुल दुबे की अदालत ने पांच आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने हथियारों की बरामदगी को पूर्णतया फर्जी और संदिग्ध मानते हुए, घटना के चार साल बाद यह फैसला सुनाया।
थाना एत्माद्दौला में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार सरताज ने आरोपी देव उर्फ नेहरू उर्फ बिट्टू के खिलाफ तहरीर देकर आरोप लगाया था कि 1 अप्रैल 2022 की शाम 6 बजे आरोपी घर के अंदर आ गया। पुत्री के साथ मारपीट कर सिर में पिस्टल का बट मारकर उसे घायल कर दिया। विरोध पर पुत्री के पेट में गोली मार दी। 1 अप्रैल 2022 को ही आरोपी ने गणेश नर्सरी में दूसरी वारदात को अंजाम दिया था। विवेचक ने थाना फतेहाबाद क्षेत्र के गांव तालोरी निवासी आरोपी देव उर्फ नेहरू उर्फ बिट्टू, कपाल पुरा निवासी अमित सविता, बाग कॉलोनी निवासी अरविंद बघेल, जरार हाउस निवासी रघु ठाकुर उर्फ रघुवंश और मलपुरा थाना क्षेत्र के जखौदा निवासी सूरज बघेल के के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट, हत्या का प्रयास, और आयुध अधिनियम के आरोप में अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। अदालत ने आरोपी देव उर्फ नेहरू व अन्य आरोपियों द्वारा की गई वारदात का एक साथ निस्तारण किया। अभियोजन पक्ष की तरफ से वादी सरताज, थानाध्यक्ष राजकुमार कुशवाह सहित 11 गवाह अदालत में पेश किए गए। हथियार बरामदगी का कोई स्वतंत्र गवाह अदालत में पेश नहीं किया।
पुलिस ने किया अजब-गजब कारनामा
अदालत ने पत्रावली के अवलोकन में पाया कि आरोपी देव उर्फ नेहरू के पास बरामद पिस्टल के सील बंद पैकेट को कोर्ट में खोलने पर उसके अंदर से 7.65 एमएम की देसी पिस्टल निकली, जबकि पुलिस ने फर्द बरामदगी में आरोपी के पास से 9 एमएम की पिस्टल बरामद दिखाई और विधि विज्ञान प्रयोगशाला में जांच के लिए 32 बोर की पिस्टल भेजी। इसी तरह आरोपी अमित सविता से बरामद 315 बोर के तमंचे को पुलिस ने जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला नहीं भेजा।