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आगरा के इन इलाकों में भूल से भी न खड़े करें वाहन, चोरों से है हर वक्त खतरा

Thu, 17 May 2018 04:45 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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demo pic - फोटो : अमर उजाला
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ताजनगरी में वाहन चोरी का आंकड़ा दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। इस पर पुलिस भी रोक नहीं लगा पा रही है। कई थानों में वाहन चोरी हो जाए तो उसकी बरामदगी होना नामुमकिन है। 
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पुलिस चोरों को गिरफ्तार कर वाहन बरामदगी का दावा भी करती है, लेकिन पंजीकरण और चेसिस, इंजन नंबर बदल दिए जाने के कारण वाहन स्वामियों का पता नहीं चल पाता। 

2017 और 2018 में 2254 दो पहिया, चार पहिया और भारी वाहन चोरी हो चुके हैं। इनमें से 1834 वाहनों का अब तक पता नहीं चल सका है।

up police - फोटो : अमर उजाला
जिले में 42 थाने हैं। एकाध थानों को छोड़कर सभी थाना क्षेत्रों में दो पहिया से लेकर चार पहिया और भारी वाहनों की चोरी होती है। साल 2017 में 1740 वाहन चोरी हुए। इनमें से 322 वाहन ही बरामद हो सके। 

बाकी वाहनों को आज तक पता नहीं चल सका। इनमें बाइकों की संख्या सबसे अधिक थी। वहीं साल 2018 की बात करें तो अब तक 514 वाहन चोरी हो चुके हैं। 98 वाहन ही बरामद किए गए। 

शहर की बात करें तो वाहन चोरी में पहले नंबर पर हरीपर्वत सर्किल आता है। इसके बाद दूसरा नंबर सदर सर्किल का है। हरीपर्वत सर्किल में तीन थाने हरीपर्वत, न्यू आगरा और सिकंदरा है। 

हरीपर्वत के बाद सदर सर्किल का नंबर 

सबसे ज्यादा वाहन चोरी हरीपर्वत में होती है। साल 2017 में हरीपर्वत में 299 वाहन चोरी हुए। इनमें से 16 ही बरामद हो सके हैं। न्यू आगरा से 274 वाहन चोरी हुए। इनमें से 63 वाहन ही बरामद किए जा सके। 

सिकंदरा में 139 में से 14 ही बरामद किए जा सके हैं। साल 2017 में ही सदर सर्किल के ताजगंज थाना में 41 में से 22, रकाबगंज में 26 में से दो और सदर बाजार में 183 में से 49 वाहन बरामद किए जा सके हैं। 

साल 2018 में न्यू आगरा में 87 वाहन चोरी हुए। इनमें से 13 बरामद किए जा सके हैं। सिकंदरा में 43 में से 11 और हरीपर्वत में 82 में से 14 वाहन बरामद किए जा सके हैं।
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संजय प्लेस और भगवान टाकीज क्षेत्र बना चोरों का अड्डा

वाहन चोरी सबसे ज्यादा संजय प्लेस और भगवान टाकीज क्षेत्र में होती है। इनमें दो पहिया वाहन की चोरी सबसे ज्यादा है। चोर लॉक तोड़कर वाहनों को चोरी करके ले जाते हैं। 

चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं। इनमें फुटेज आने के बाद भी चोर नहीं पकड़े जाते। पुलिस तैनात रहती है, लेकिन उससे भी कोई फायदा नहीं होता है।  
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