स्वास्थ्य विभाग की 20 टीमों ने शुक्रवार को अस्पतालों का सर्वे करना शुरू किया। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में शाम तक 55 अस्पतालों के सर्वे की रिपोर्ट दी गई। स्वास्थ्य विभाग के छापे के बीच अस्पतालों बेसमेंट में ताले डाल दिए गए हैं। टीमों को अधिकतर अस्पतालों में बेसमेंट खुला नहीं मिला।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें अस्पतालों के सर्वे के दौरान अपनी फोटो भी खींच रही हैं। गूगल लोकेशन के साथ उसे विभाग के ग्रुप में साझा किया जा रहा है। जिससे यह स्पष्ट हो सके कि टीम मौके पर गई थी। सर्वे में अस्पताल का नाम, पता, पंजीकरण की वैधता की अवधि, संचालक का नाम, मोबाइल नंबर, अस्पताल के प्रभारी का नाम, डिग्री, अस्पताल का एरिया (वर्ग मीटर में), अस्पताल के सामने की जगह (मीटर में), सामने स्थित रोड की चौड़ाई, भवन की ऊंचाई, अग्निशमन के लिए निर्धारित मानकों की उपलब्धता की स्थिति, प्रवेश और बाहर निकलने की रास्ते की स्थिति, बायोवेस्ट के निस्तारण की स्थिति, कुल उपलब्ध बेड, आईसीयू बेड, पैथोलॉजी लैब, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई, जनरेटर, एंबुलेंस, मेडिकल स्टोर की उपलब्धता की स्थिति की जानकारी ली जा रही है। टीम को अपनी टिप्पणी भी देनी है। अस्पताल के संचालक या उपलब्ध स्टाफ के साथ सर्वे करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर होने हैं।
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मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि भवन निर्माण व विकास उपविधि 2008 में दी गई है व्यवस्था के अनुरूप नर्सिंग होम के निर्माण में 40 फीसदी से अधिक भूमि आच्छादित नहीं होनी चाहिए। आवासीय क्षेत्र में नर्सिंग होम के लिए भूखंड का न्यूनतम क्षेत्रफल 300 वर्ग मीटर और गैर आवासीय क्षेत्र में 500 वर्ग मीटर होना चाहिए। इसके सामने रोड क्रमश: 12 व 18 मीटर का होना चाहिए।