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चंबल नहर के पंप हाउस के पिलर से टकराया स्टीमर

Mon, 27 Jul 2015 01:54 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
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चंबल नदी में आए उफान की लहरों के बीच अनियंत्रित हुआ स्टीमर पिनाहट घाट पर पलटने से बाल-बाल बच गया। स्टीमर चंबल नहर के पंप हाउस के पिलर से टकरा गया। इससे उसमें सवार 50 यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई। कई ने नदी में कूदकर भागे। बड़ा हादसा टलने के बाद भी न पुलिस और न पीडब्ल्यूडी ने कोई एहतियाती कदम उठाया है।
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बता दें कि चंबल नदी में उफान के बाद भी पिनाहट घाट पर यात्रियों की जान जोखिम में डालकर स्टीमर का संचालन किया जा रहा है। रविवार शाम करीब 50 लोगों को लेकर पिनाहट से मध्य प्रदेश की सीमा की ओर चले स्टीमर का संतुलन नदी के उफान की लहरों के चलते बिगड़ गया। कोई कुछ समझ पाता इससे पहले ही स्टीमर चंबल नहर के पंप हाउस के पिलर से जा टकराया। यह देख कुछ यात्रियों ने स्टीमर को कंट्रोल करने में मदद की तो कुछ ने जान खतरे में देख चीख पुकार मचा दी। वही कुछ जान बचाने के लिए नदी में कूद गए। गनीमत रही कि किनारे से कुछ गज की दूरी पर हादसा होने के कारण कोई हताहत नहीं हुई। इसके बाद भी ठेकेदार ने कोई सबक नहीं लिया है। स्टीमर का संचालन रोकने के लिए पुलिस और पीडब्ल्यूडी ने भी अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है।

11 घंटे में 11 मीटर बढ़ा चंबल का जलस्तर 
बाह/पिनाहट (आगरा)। चंबल नदी में जलस्तर तेजी से खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है। रविवार को 11 घंटों में जलस्तर 11 मीटर बढ़कर 127 पर पहुंच गया। जो खतरे के निशान 130 मीटर से महज तीन मीटर दूर है। पानी बढ़ने से तटवर्ती गांवाें के संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं। प्रशासन ने बचाव और राहत के लिए होमवर्क शुरू कर दिया है। आठ बाढ़ चौकियां गठित कर लेखपालों को गांव में ही रुकने के निर्देश दिए गए हैं।
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चंबल नदी में राजस्थान के झालाबाड़ डिवीजन के कोटा बैराज से 24 जुलाई को छोड़ा गया 3.80 लाख क्यूसिक पानी आगरा के बाह क्षेत्र में पहुंचना शुरू हो गया है। नदी का जलस्तर रविवार को पूर्वाह्न 11 बजे 116 मीटर पर था। इसके बाद से बढ़ना शुरू हुआ जलस्तर देरशाम 10 बजे तक 127 मीटर पर पहुंच गया। अब खतरे का निशान महज तीन मीटर दूर रह गया है। तटवर्ती गांव पुरा शिवलाल, रेहा, उमरैठा पुरा, झरनापुरा, डालपुरा, मऊ की मढै़या, गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा के संपर्क मार्गों पर पानी पहुंच गया है। तटवर्ती गांवों के लोग ऊंचाई वाले इलाकों में जाने लगे हैं। वन विभाग के हाई अलर्ट के बाद अब तहसील प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। तहसीलदार कुमार संजय ने बताया कि आठ बाढ़ चौकियां मन्सुखपुरा, पिनाहट, उमरैठा, बासौनी, सिमराई, पुरा भगवान, खेड़ा राठौर, नंदगवां में गठित की जा रही है। इसके साथ ही क्षेत्र के हर गांव के हल्का लेखपाल को रात में गांव में ही स्टे करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें जलस्तर के बारे में रिपोर्ट करने की हिदायत दी गई है।

लोफ्लड जोन के गांवों में लोग जागने को मजबूर
लोफ्लड जोन में आने वाले तासौड़, करकौली, महंगौली, विप्रावली, पिनाहट, उटसाना, उमरैठा, बघरैना, बासौनी, गुढ़ा, गोैहरा, रानीपुरा, चीकनीपुरा, नंदगवां आदि में रविवार रात लोग जागते रहे। बाढ़ के खतरे को देखते हुए लोग घर की छतों पर नजर आए।
ये हैं मीडियम और हाई फ्लड जोन वाले गांव
मीडियम फ्लड जोन में रेहा, बरेण्डा और हाई फ्लड जोन में क्योरी, जेबरा, कुंवर खेड़ा, बमरौली, पुरा भगवान, गौसिली, सिमराई, खेड़ा राठौर, महुआशाला आदि गांव शामिल हैं। इन गांवों में भी हाई अलर्ट जारी किया गया है।
इन गांवों में पहुंचा पानी लेकिन सूची में नहीं
चंबल नदी किनारे बसे पुरा शिवलाल, पुरा डाल, झरनापुरा गांव के संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं। लेकिन बाढ़ राहत की सूची में इनका कोई उल्लेख नहीं किया गया है। जबकि सबसे ज्यादा ये तीनों गांव प्रभावित होते हैं।
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