दिल्ली में भारतीय स्टेट बैंक में प्रोबेशनरी आफिसर (सहायक प्रबंधक) के पद पर चयन के बाद प्रशिक्षण पर आगरा आए बुलंदशहर के जितेंद्र कुमार की बुधवार को मौत हो गई। परिजनों ने बैंककर्मियों और अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया।
गांव उमरारा (डिबाई), बुलंदशहर निवासी जितेंद्र कुमार (24) पुत्र भूपेंद्र कुमार आर्य का भारतीय स्टेट बैंक में प्रोबेशनरी आफिसर के पद पर दो जनवरी को दिल्ली में नियुक्ति हुई थी। छह जनवरी को जितेंद्र को आगरा में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया।
उनके फूफा नरेश कुमार ने बताया कि जितेंद्र का प्रशिक्षण विभव नगर स्थित होटल सौरभ में चल रहा था। 15 जनवरी को भारतीय स्टेट बैंक के कर्मचारियों ने एसएन मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के पैनल के माध्यम से रक्तदान शिविर का आयोजन किया। 31 कर्मचारियों ने भाग लिया।
नरेश कुमार का आरोप है कि जितेंद्र की तबीयत खराब थी। इसके बावजूद उसको भी रक्तदान के लिए बुलाया गया। उसने मना किया लेकिन कहा गया कि यह प्रशिक्षण का हिस्सा है। यह करना जरूरी है। दोपहर तीन बजे उसने रक्तदान किया।
आधा घंटे बाद जितेंद्र की हालत बिगड़ गई। उसे फतेहाबाद रोड स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत में सुधार नहीं होने पर एसएन मेडिकल कॉलेज लेकर गए, जहां रात तकरीबन 11 बजे जितेंद्र की मौत हो गई।
जानकारी पर रात तकरीबन दो बजे जितेंद्र के पिता भूपेंद्र और मां अनीता आ गईं। परिजनों ने बैंक अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस से शिकायत करेंगे। थाना ताजगंज के प्रभारी निरीक्षक अनुज कुमार ने बताया कि जांच की जा रही है। परिजनों ने तहरीर नहीं दी है।
मेधावी बेटे की मौत से परिवार में कोहराम
भारतीय स्टेट बैंक में पीओ बनने वाले जितेंद्र कुमार सिंह के परिजनों ने बताया कि उन्होंने कोलकाता से बीटेक करने के बाद एमटेक भी किया था। इसके बाद जर्मनी में पीएचडी के लिए चयन हो गया था। जितेंद्र को छात्रवृत्ति मिली थी। उसे जर्मनी भेजा गया था। छह महीने तक रहने के बाद वापस आ गए।
इसके बाद बैंक की तैयारी में लग गया। पिता भूपेंद्र कुमार आर्य पोस्टमास्टर हैं। वहीं एक महीने पहले बड़ी बहन प्रिया की शादी हुई थी। छोटी बहन जया 12वीं और भाई राहुल 10वीं का छात्र है। जितेंद्र की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। माता-पिता के आंसू नहीं रुक रहे हैं।