आगरा विकास प्राधिकरण की दोहरी नीतियां देखिए। एक तरफ लेवाना होटल अग्निकांड में 4 लोगों की मौत के बाद अनियमितता व लापरवाही पर लखनऊ प्राधिकरण के 15 अधिकारी व इंजीनियर निलंबित हो गए हैं, दूसरी तरफ कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन मॉकड्रिल कांड से सुर्खियों में आए श्रीपारस अस्पताल के विरुद्ध अवैध निर्माण का नोटिस जारी होने के 15 महीने बाद एडीए कार्रवाई नहीं की गई है।
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पिछले साल अप्रैल में आगरा विकास प्राधिकरण ने श्रीपारस को अवैध निर्माण करने व बिना नक्शा पास कराए अस्पताल संचालित करने पर नोटिस दिया था। लेकिन रसूख के आगे यहां नियम-कायदे बौने साबित हुए। नोटिस देने के बाद ध्वस्तीकरण करने की बजाय विकास प्राधिकरण कार्रवाई भूल गया। जबकि मुख्यमंत्री के आदेश पर लखनऊ विकास प्राधिकरण लेवाना होटल के विरुद्ध अवैध निर्माण पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने जा रहा है।
एडीए के अलावा श्रीपारस अस्पताल के पास अग्निशमन, नगर निगम, जल एवं वायु प्रदूषण, राष्ट्रीय राजमार्ग, नजूल व सिंचाई विभाग की एनओसी भी नहीं थीं। जिस प्लॉट में अस्पताल की बिल्डिंग खड़ी की गई उसका 20 साल पहले आवासीय भवन में नक्शा पास हुआ था। जबकि मौके पर अस्पताल के रूप में व्यावसायिक गतिविधियां हो रही थीं। इस मामले में प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठे थे। प्रशासन ने अस्पताल को क्लीन चिट दे दी। पुलिस ने एफआईआर के बावजूद गिरफ्तारी नहीं की। उधर, अब शासन से भी अस्पताल को क्लीनचिट मिल गई है।
मुझे नहीं पता क्या होगा
श्रीपारस अस्पताल के मामले में क्या कार्रवाई होनी है मुझे नहीं पता। ध्वस्तीकरण या सीलिंग प्रवर्तन अनुभाग देखता है। नोटिस जारी किया था। आगे क्या हुआ मुझे नहीं पता। - आरके सिंह, मुख्य नगर नियोजक, आगरा विकास प्राधिकरण
कल दिखवाता हूं फाइल
नोटिस का जवाब आया कि नहीं दिखवाना पड़ेगा। कल फाइल दिखवाता हूं। तभी कुछ बता सकूंगा। नोटिस के बाद जवाब नहीं देने पर ध्वस्तीकरण का प्रावधान है। - आरपी सिंह, प्रभारी प्रवर्तन, आगरा विकास प्राधिकरण