ठाकुर रंगजी महाराज मंदिर, वृंदावन के ट्रस्ट की तरफ से 31 वर्ष पुराना मुकदमा अदालत ने खारिज कर दिया है। अपर सिविल जज अर्पित सिंह ने वाद ग्रस्त संपत्ति के पहचान योग्य न होने के आधार पर वादी का वाद निरस्त कर सरकार के हक में फैसला दिया।
आगरा के शिल्पग्राम से जुड़ी जमीन पर श्री ठाकुर रंगजी महाराज के स्वामित्व पर कब्जे को लेकर सरकार के खिलाफ प्रस्तुत वाद को न्यायालय ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने 31 साल बाद सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया।
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मामले के अनुसार, श्री ठाकुर रंगजी महाराज ट्रस्ट वृंदावन के स्वामी गोवर्धन रंगाचार्य महाराज ने 31 वर्ष पूर्व परिवाद दायर किया। इसमें संयुक्त निदेशक उद्यान को प्रतिवादी बनाया। वाद में कथन किया कि खसरा संख्या 508 मौजा बसई मुस्तक़िल परगना, आगरा की 8 बिसवां जमीन का वह जमींदार एवं मालिक हैं। वह जमीन पर काबिज है। उनका नाम वाद ग्रस्त संपत्ति के बाबत राजस्व अभिलेखों में मालिक के रूप में दर्ज है। संपत्ति पर पेड़ लगे हैं। उक्त जमीन 18 बिसवां थी। वर्ष 1977 में उक्त जमीन से 10 बिसवां जमीन अधिकृत कर ली गई थी। अब 8 बिसवां जमीन के वो मालिक हैं।
वादी ने कोर्ट से आग्रह किया कि प्रतिवादी को निषेधित कर दिया जाए कि वह वादग्रस्त संपत्ति पर कब्जा दखल में हस्तक्षेप न करें। दक्षिणी हिस्से में निर्मित दीवार को हटा लें। सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता गौरव जैन ने पक्ष रखा। कहा कि वाद ग्रस्त संपत्ति की भूमि शिल्पग्राम के कब्जे में है। उन्होंने ही वाद ग्रस्त संपत्ति पर निर्माण कराया है। अपर सिविल जज अर्पित सिंह ने वाद ग्रस्त संपत्ति के पहचान योग्य न होने के आधार पर वादी का वाद निरस्त कर सरकार के हक में फैसला दिया।