भगवान केशवदेव द्वारा अपने भक्तगण महेंद्र प्रताप सिंह व अन्य के माध्यम से 13.37 एकड़ जमीन पर किए गए दावे पर सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में शुक्रवार को सुनवाई होगी। इस केस की अदालत में सुनवाई की पहली तारीख है। हालांकि अभी तक अन्य मामलों में कोर्ट में दावे दाखिल नहीं हो सके हैं। इस संबंध में सुप्रीमकोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री और मनीष यादव भी अदालत में दावा कर चुके हैं।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन समिति के अध्यक्ष महेन्द्र प्रताप सिंह एडवोकेट व अन्य द्वारा 23 दिसंबर 2020 को सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में दावा दाखिल किया गया। यह पहला दावा है जो कि अदालत में सीधे तौर पर दर्ज कर लिया गया। उनके द्वारा श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थित भगवान केशवदेव को वादी बनाकर दावा दाखिल किया गया है।
इस दावे पर सुनवाई की पहली तारीख होगी। जिसमें उनके द्वारा यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन, शाही मस्जिद ईदगाह के सचिव के अलावा श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के ट्रस्टी तथा श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव को प्रतिवादी बनाया गया है। इस संबंध में जानकारी देते हुए वादी महेन्द्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने बताया कि उन्होंने 13.37 एकड़ जमीन से शाही मस्जिद ईदगाह के कब्जे को हटवाने के उद्देश्य से दावा किया है।
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ये कर चुके हैं दावा
श्रीकृष्ण जन्मस्थान की कटरा केशवदेव की भूमि को लेकर पहले दो पक्ष अदालत पहुंच चुके हैं। इनमें अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री के अलावा अन्य वादीगण और हिंदू आर्मी चीफ मनीष यादव शामिल हैं।
कोर्ट इसलिए पहुंचे ठाकुर केशवदेव
भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न नामों से पूजा की जाती है। उनमें जिस नाम से श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भगवान को जाना जाता है वह नाम ठाकुर केशवदेव है। वादीगण के अनुसार ठाकुर केशवदेव के नाम से कटरा का नाम कटरा केशवदेव पड़ा है। इसलिए भगवान का यह रूप ही वादी बना।