कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए लोग घरों से कम ही बाहर निकल रहे हैं। ऐसे में इंटरनेट मीडिया को जानकारी का माध्यम बना लिया है। लेकिन, नकारात्मकता लाने वाले एक जैसे वीडियो कंटेंट और जानकारी को बार-बार देखने से भी तनाव बढ़ सकता है। ऐसे में प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है, इसलिए सकारात्मक वीडियो कंटेंट देखने को ही प्राथमिक दें। यह कहना है आगरा के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. दिनेश राठौर का। उन्होंने कहा कि कोरोना के तनाव से बचना है तो अच्छा सुनें, अच्छा देखें।
उन्होंने कहा कि मोबाइल पर इंटरनेट मीडिया के बजाय परिवार के लोगों के साथ ज्यादा समय बिताएं। कोरोना से बचाव के उपचार के साथ ही लोगों को अपनी सकारात्मक मानसिकता को भी बनाए रखना होगा। जब हम नकारात्मकता के बारे में ज्यादा सोचते हैं तो घबराहट होने लगती है। इससे सांस लेने की गति बढ़ जाती है। सांस की मांसपेशियों के काम अधिक करने की वजह से ऑक्सीजन की मांग बढ़ जाती है। इससे ऑक्सीजन की कमी हो सकती है।
ऑफ स्क्रीन परिवार के साथ समय बिताएं
डॉ. दिनेश राठौर का कहना है कि लोगों को चाहिए कि वह सकारात्मकता लाने के लिए अपना समय परिवार के साथ बिताएं। यह समय ऑन स्क्रीन नहीं, बल्कि ऑफ स्क्रीन होना चाहिए। मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर से दूरी होनी चाहिए। समय पर टहलने जाएं और व्यायाम करें। यह भी शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है। इससे मन हल्का होगा। सकारात्मकता का भाव आएगा। परिवार के लोगों के बीच भी दूरी कम हो जाएगी। मानसिक रूप से भी शक्ति प्राप्त होगी।