ठोस साक्ष्य और दस्तावेज जुटाएंगे
एसटीएफ के एसपी राकेश कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय में हुए घोटाले और फर्जीवाड़े की जांच के लिए विशेष कर्मचारियों को लेने के लिए मुख्यालय को पत्र लिख दिया है। विशेषज्ञ निरीक्षक और दरोगा दस्तावेज जुटाएंगे। जिससे उन्हें ठोस साक्ष्य के रूप में प्रयोग किया जा सके। टीम में दूसरे विभागों के कर्मचारियों की भी मदद ली जा सकती है।
सेंट जोंस के पास बना कार्यालय
एसटीएफ ने अब सेंट जोंस के पास एक कॉलोनी में कार्यालय बनाया है। विश्वविद्यालय परिसर में बनाए गए कार्यालय में सूचना देने वाले कम आने की आशंका जाहिर की गई थी। इस पर यह कार्यालय खोला गया। इस कार्यालय में लोग आसानी से सूचना देने भी आ सकेंगे।
इनका जवाब चाहिए
- विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त कालेजों की संख्या। मान्यता और शिक्षकों की भर्ती की क्या प्रक्रिया रही?
- केंद्र से कॉपियां निकलने के बाद बदल दी जाती थीं? एजेंसी पर कॉपियां पहुंचने समय देखा जाता था या नहीं?
- कॉपियों पर भी नंबर लिखा जाता है। इसका मिलान किया गया या नहीं? कॉपियां कहां से तैयार की गईं?
- भर्ती, केंद्र निर्धारण, निर्माण में भी घोटालों की शिकायतें क्या सही हैं। कौन-कौन कर्मचारी शामिल हैं?
एमबीबीएस की कापियों में लेखनी अलग-अलग
एमबीबीएस की कॉपियों का मिलान करने पर शिक्षा माफिया की कारस्तानी पकड़ में आ रही है। छात्र एक है और उसकी कॉपियों में लेखनी अलग-अलग है। जांच में ये कॉपियां आगरा और मथुरा के निजी मेडिकल कॉलेज की हैं।
एसटीएफ ने एमबीबीएस की 26 कॉपियां बदली हुई पकड़ी हैं। एमबीबीएस की 4 साल की कॉपियां मिलाई जा रही हैं। चारों साल की कॉपियों में लेखनी बदली हुई मिल रही है। इससे आशंका है कि कॉपियां बदलने का खेल लंबे समय से चल रहा है। अभी और कॉपियों का मिलान हो रहा है। इससे और फर्जीवाड़ा पकड़ में आएगा।