विजय नगर स्थित संकेत राजकीय मूक बधिर विद्यालय के बच्चों ने यूपी बोर्ड 2025 की हाईस्कूल परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर मिसाल कायम की है। ये वे बच्चे हैं जो ना सुन सकते हैं, ना बोल सकते हैं, और परिवार के आर्थिक हाल भी बहुत बेहतर नहीं हैं। फिर भी इन बच्चों ने साबित कर दिया कि जब इरादे मजबूत हों, तो कोई भी कमी सपनों की उड़ान नहीं रोक सकती।
यूपी बोर्ड 2025 की हाईस्कूल की परीक्षा में संकेत राजकीय मूक बधिर विद्यालय के कुल 28 दिव्यांग छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से 10 ने प्रथम और 17 ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। वहीं, 1 छात्रा विफल रही।
इन बच्चों की सफलता की राह में शारीरिक चुनौतियां और आर्थिक तंगी रोड़ा बनकर खड़ी रही, मगर इन्होंने हार नहीं मानी। इशारों की भाषा में पढ़ते-लिखते हुए, उन्होंने बोर्ड परीक्षा में सफलता की कहानी खुद लिख दी। विद्यालय की शिक्षक पल्लवी तिवारी बताती हैं कि इन बच्चों में सीखने की ललक होती है। बाैद्धिक स्तर से मजबूत होते हैं। बस राह दिखाने की जरूरत होती है। इस सफलता के लिए बच्चे खुद जिम्मेदार हैं। प्रधानाचार्या ममता सिंह ने सफलता का श्रेय छात्रों की मेहनत को दिया। उन्होंने कहा कि ये बच्चे हमें हर दिन सिखाते हैं कि जीवन में सबसे बड़ी ताकत हाैसला होता है।
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मजदूरी से लिखी सफलता की राह
कासगंज के रहने वाले रामगोपाल ने 67.6 प्रतिशत अंक हासिल कर संकेत राजकीय मूक बधिर विद्यालय में टाॅप कर अपनी सफलता की कहानी लिख दी। वह आगरा विद्यालय के हाॅस्टल में ही रहते थे। मां सोमवती ने बताया कि वह छुट्टी में घर पर आता था और मजदूरी करता था। घर में चारों बच्चे मूक-बधिर हैं। पति मोहनलाल मजदूरी करते हैं पर स्वास्थ्य के चलते हार गए हैं। आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो गई है। रामगोपाल ने स्वयं ही अपनी पढ़ाई की।
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परीक्षा से पहले हुआ पिता का निधन
संकेत राजकीय मूक बधिर विद्यालय की छात्रा प्रज्ञा राजाैरिया ने 67 प्रतिशत पाकर स्कूल में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। वह रोज अलीगढ़ से आगरा आती थीं। दिव्यांगता भी उनके इरादों के आगे नतमस्तक हो गई। प्रज्ञा की मां बेबी ने बताया कि बोर्ड परीक्षा से एक महीने पहले प्रज्ञा के पिता चेतन प्रकाश का निधन हो गया था। जिसके चलते वह काफी परेशान हो गई थी। प्रज्ञा को टीचर्स ने वीडियो काॅल और इशारों के जरिए पढ़ाया। पिताजी के जाने के बाद आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो गई है। लेकिन प्रज्ञा के भविष्य में इसको बाधक नहीं बनने दिया।
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इशारों से पढ़कर पाया तीसरा स्थान
अलीगढ़ के रहने वाले देवेंद्र कुमार वार्ष्णेय व्यापार करते हैं उनके पुत्र गगन ने 66.4 प्रतिशत पाकर स्कूल में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। मां इंदू वार्ष्णेय गृहणी हैं। गगन के मूक बधिर होने के चलते उसे इशारों से पढ़ाया जाता था। इसमें उसकी बहनों ने काफी सहयोग किया। वह भी रोज अलीगढ़ से आगरा आते-जाते थे। बहन वंशिका ने बताया कि पेपर के दो दिन पहले से ही गगन को मानसिक रूप से परीक्षा के लिए तैयार कर पढ़ने बैठाया जाता था। स्कूल के शिक्षक से बातचीत कर अहम चीजों को पढ़ाते थे। आगे की पढ़ाई के लिए एएमयू में साइंस स्ट्रीम के लिए आवेदन करा है।