आगरा में लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस एक बार फिर साथ हैं। विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा में दोनों दल साझा चुनाव लड़ेंगे। दल भले ही जुड़ गए हों, लेकिन कार्यकर्ताओं में गठबंधन नहीं हो पा रहा है। दोनों दलों के बीच चुनावी रणनीति के लिए प्रदेश-राष्ट्रीय नेता तक एक मंच पर नहीं जुटे हैं। इसका असर चुनावी तैयारी में हो रहा है।
गठबंधन में सपा को आगरा और कांग्रेस को फतेहपुर सीकरी की सीट खाते में आई है। 25 फरवरी को राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भले ही शामिल हुए, लेकिन वे 10 किमी तक ही साथ रहे। इसके बाद से दोनों ही दलों के राष्ट्रीय और प्रदेश के बड़े नेताओं की बैठक नहीं हुई है। इसका असर ये हुआ कि जिले स्तर पर भी दोनों दलों क कार्यकर्ता सांमजस्य नहीं बिठा पा रहे हैं। चुनावी तैयारियां समेत मतदाताओं तक पहुंचने के लिए भी अभी तक ठोस रणनीति नहीं बन पाई है।
प्रत्याशी घोषित करने में भी पिछड़ा गठबंधन
पूर्व के चुनावों में सबसे बाद में प्रत्याशी घोषित करने वाली भाजपा ने इस बार आगरा-फतेहपुर सीकरी में बाजी मार ली। पार्टी ने मौजूदा सांसदों को ही फिर से मैदान में उतार दिया है। बसपा ने भी आगरा लोकसभा से प्रत्याशी घोषित कर दिया है। हालांकि बसपा ने फतेहपुर सीकरी प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। इसके उलट सपा-कांग्रेस दोनों ही प्रत्याशी घोषित करने में पिछड़ गए हैं। आगरा से सपा का प्रत्याशी उतरना है, इनके प्रत्याशी के नामों की भी सुगबुगाहट नहीं है। फतेहपुर सीकरी पर कांग्रेस के सूत्र राजबब्बर को पहली पसंद बताकर चर्चाओं में हैं।
दोनों दलों की साझा बैठक
सपा जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण वर्मा का कहना है कि लोकसभा चुनाव की अपने स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। अभी राष्ट्रीय-प्रदेश के नेताओं के साथ आगरा में बैठक नहीं हो पाई है। 17 को प्रत्याशी सार्वजनिक होने की उम्मीद है, इसके बाद कांग्रेस नेताओं के साथ युद्धस्तर पर प्रचार किया जाएगा।
यात्रा के बाद होगी साझा बैठक
कांग्रेस शहर अध्यक्ष देवेंद्र सिंह चिल्लू का कहना है कि अभी दोनों दलों की बड़ी बैठक नहीं हो पाई है। 17 को भारत जोड़ो यात्रा संपन्न होने के बाद राहुल गांधी चुनावी रणनीति में सक्रिय हो जाएंगे। इसके बाद सपा-कांग्रेस के प्रदेश और राष्ट्रीय नेताओं के सानिध्य में जिला-शहर इकाइयों की बैठक होगी।