पहले विधानसभा और फिर नगर निगम चुनाव में सपा को मिली करारी शिकस्त से संगठन के हौसले पस्त हो गए हैं। संगठन को मजबूत करने की बजाय आपसी खींचतान बढ़ गई है। ऐसे में अधिकांश पदाधिकारी और वरिष्ठ नेता अब बदलाव का इंतजार कर रहे हैं।
इसके चलते संगठन को मजबूत करने का सिलसिला थम गया है। नए साल के पहले माह में जिला और महानगर इकाई में बदलाव के संकेत मिले हैं।
नगर निगम में सपा का प्रदर्शन काफी खराब रहा। पिछले साल नगर निगम में जहां पार्टी के 22 पार्षद हुआ करते थे, इस बार सिर्फ पांच ही रह गए हैं।
इसको लेकर जिला और महानगर इकाई एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। इस संबंध में दोनों गुटों के कुछ लोगों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से शिकायत की है। उन्होंने साक्ष्य भी उपलब्ध कराए। किस तरह से बी फार्म पर व्हाइटनर लगाकर बी फार्म बदल दिए गए, इसकी जानकारी दी है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इन सबकी समीक्षा शुरू कर दी है। वर्ष 2019 में होने वाले चुनाव के लिए पार्टी अगले साल के मध्य से ही पूरी ताकत के साथ जुट जाने की तैयारी में है। इसके लिए संगठन में बदलाव पर कवायद चल रही है। सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय अध्यक्ष के निशाने पर जिला और महानगर दोनों अध्यक्ष हैं।