सोरोंजी (कासगंज)। बेसिक शिक्षा परिषद की आठवीं की हिंदी पुस्तक मंजरी में तुलसीदास की जन्म भूमि राजापुर बताया जाना गलत है। शिक्षाविदों ने सोरोंजी को ही गोस्वामी तुलसीदास की जन्म स्थली बताया है। वहीं पुस्तक में संशोधन किए जाने की बात कही है। सोरोंजी में इसके प्रमाण भी मौजूद हैं। वहीं सातवीं की कक्षा में तुलसीदास की जन्म स्थली सोरोंजी ही बताया है, जो सही है। अलग अलग कक्षाओं में दो तथ्य दिए जा रहे हैं, इससे बच्चों में भ्रम की स्थिति होती है।
- बच्चों के जब सीखने की उम्र होती है। उस उम्र में उन्हें गलत तथ्य पढ़ाए जाएंगे तो यह उनके भविष्य से खिलवाड़ होगा। सोरोंजी में तुलसी का गर्भगृह, तुलसी के गुरु नरहरि की पाठशाला, तुलसी के चचेरे भाई नंद दास का श्यामसर स्थित घर के अवशेष आदि तमाम पौराणिक शोध तुलसीदासजी की जन्मभूमि यहीं होने के पुख्ता प्रमाण है। बेसिक शिक्षा परिषद को अपनी भूल सुधार करते हुए आठवीं की कक्षा में तुलसी जन्म स्थान राजापुर को हटाकर वास्तविक तुलसी जन्मभूमि सोरोंजी सूकरक्षेत्र लिखना चाहिए। -कुशल पाल सिंह पुंढीर, शिक्षाविद।
- हिंदी के नामचीन विद्वानों डॉ. रामदत्त भारद्वाज, डॉ. नरेश चंद्र बंसल, डॉ. रामकृष्ण शर्मा, डॉ. रामकृष्ण शर्मा आदि ने अपने तमाम शोध करके तुलसी जन्म भूमि की वास्तविकता पर अनेक प्रमाणिक पुस्तकें लिखीं हैं। बेसिक शिक्षा परिषद ने आठवीं की हिंदी पुस्तक मंजरी में तुलसी जन्मभूमि राजापुर दर्शा कर गलत तथ्य प्रकाशित किया है। बेसिक शिक्षा परिषद की प्रमाणिकता के आधार पर इसे संशोधन करना चाहिए। - सुरेश चंद्र त्रिवेदी, शिक्षाविद
- शासन के द्वारा पुस्तकों में तुलसीदास की जन्म स्थली के बारे में अलग अलग कक्षाओं की पाठ्य पुस्तकों में जो मतभेद हैं, उस संबंध में कुछ भी नहीं कह सकते। जो पाठ्य पुस्तकों में लिखकर आया है उसे ही बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। इसमें शासन स्तर से ही सुधार संभव है।
- राजीव यादव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।