रामलाल वृद्धाश्रम में बुर्जुग महिला
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कैलाश मंदिर में बाबा के दर्शन कराऊंगा मां। तेरी कसम तुझे ऐसे दर्शन होंगे कि जैसे कभी फिर नहीं होंगे। बाबा के दर्शन की झूठी कसम दिलाकर जब कलयुगी बेटा अपनी मां के आंचल झटक कर जंगल में छोड़कर चल दिया, तो मां और बेटे के रिश्तों पर ऐसा दाग लगा कि लोग ‘आह’ के सिवा कुछ और नहीं बोल सके।
राजामंडी की रहने वाली महादेवी कैलाश मंदिर के पीछे चार घंटे तक अपने बेटे जितेंद्र और बहू किरन के आने का इंताजर करती रही। 75 साल की बुजुर्ग महिला पर रामलाल वृद्ध आश्रम के सेवादारों की नजर पड़ी। दर्द से कराह रही मां ने रोते हुए जब पूरा हाल बताया तो सेवादारों की आंखों में भी आंसू आ गए। रामलाल वृद्ध आश्रम पहुंची महादेवी भी उन 250 बुजुर्गों में शामिल हो गईं जिनके बेटे और बहू ने उन्हें घर से बेघर कर दिया है। महादेवी का कहना है कि उनका बेटा यह कहकर अपनी पत्नी के साथ घर से चला था कि दर्शन कराने के बाद घूमेंगे। मैं कहती हूं कि जो मेरे बेटे ने मेरे साथ किया, ऐसा कोई बेटा अपनी मां के साथ नहीं करे। पैरों में परेशानी के कारण उन्हें चलने में काफी दिक्कत हो रही है। इसके बाद भी अपने दर्द को दबाते हुए अपने बेटों को दुआ देते हुए कहती हैं कि ‘बेटा तू अगर मुझसे परेशान था, तो मैं खुद कहीं चली जाती।’
बेटे की याद आ रही
जंगल में मिली अम्मा महादेवी का इलाज आश्रम में चल रहा है। वह अपने बेटे को दिन में कई बार याद करती हैं। आश्रम में रह रहे बुजुर्गों से बातचीत करते हुए कहती हैं कि मेरे बेटे ने कोई गलती कर दी है। वो मुझे लेने आएगा। मैं उसे माफ कर दूंगी। रामलाल वृद्ध आश्रम के मैनेजर शिव प्रसाद शर्मा का कहना है कि आश्रम उन्हें अपना यहां रख रहा है। उनका इलाज भी कराया जा रहा है।