आगरा। पुलिस आयुक्त की धर्मांतरण मामले का खुलासा करने पर मुख्यमंत्री ने पीठ थपथपाई थी। इसके बावजूद थाने-चाैकी में तैनात पुलिसकर्मी ही विभाग की किरकिरी करा रहे हैं। किरावली थाने में किसान को उल्टा टांगकर पीटने का मामला सिर्फ निलंबन तक सिमटकर रह गया। प्राथमिकी तक दर्ज नहीं हुई। वहीं अब छेड़छाड़ पीड़िता के केस में रुपये लेकर नाम निकालने के आरोप लग रहे हैं।किरावली के गांव करहरा निवासी राजू को पुलिस ने 21 दिसंबर को थाने में बुलाया था। पूर्व फाैजी बनवीर सिंह की हत्या के मामले में पूछताछ की थी। किसी का नाम नहीं बताने पर राजू को उल्टा लटका दिया और डंडे से पिटाई की थी। उसके बेहोश होने पर अस्पताल ले गए थे। इस मामले में एसओ नीरज कुमार सहित तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित और एसीपी अछनेरा को हटाने की कार्रवाई की गई। पीड़ित राजू ने 25 दिसंबर को तहरीर दी थी लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। उसका कहना है कि पुलिसकर्मियों को निलंबित ही किया गया। उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। बेवजह मारपीट करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
एक सप्ताह बाद भी जांच अधूरी
अपर पुलिस आयुक्त रामबदन सिंह मामले की जांच मिली है। एक सप्ताह बाद भी जांच अधूरी है। इस पर पीड़ित ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मारपीट का सुबूत अधिकारियों के सामने हैं। इसके बावजूद किस बात का इंतजार किया जा रहा है। पुलिसकर्मियों पर कोई कानून लागू नहीं होता है।
महिला दरोगा का प्रकरण भी चर्चा में
एत्मादपुर की दरोगा नीतू का ऑडियो चर्चा में है। विभागीय कर्मचारी कह रहे हैं कि दरोगा ने इंस्पेक्टर पर आरोप लगा दिए। इससे विभाग की किरकिरी हो रही हैं। शिष्टाचार नीति की भी पोल खुल रही है। अधिकारियों ने अधीनस्थों को निर्देश दिए हैं कि हर केस की विवेचना पर नजर रखी जाए। किसी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।