फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Agra News: नए साल में शुरू होगा एसएन का सुपर स्पेशियलिटी विंग, 200 बेड की होगी व्यवस्था, मिलेंगी ये सुविधाएं

Thu, 22 Dec 2022 02:27 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

एसएन मेडिकल कॉलेज में 200 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा सुपर स्पेशियलिटी विंग में मार्च 2023 से इलाज शुरू कर दिए जाने की योजना है। काम तेजी से चल रहा है। 
विज्ञापन
सुपर स्पेशियलिटी विंग की इमारत - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नए साल में मरीजों को एसएन मेडिकल कॉलेज में और अधिक व स्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। 200 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा सुपर स्पेशियलिटी विंग में मार्च 2023 से इलाज शुरू कर दिए जाने की योजना है। काम तेजी से चल रहा है। सुपर स्पेशियलिटी विंग में मरीजों को एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी व बाईपास सर्जरी की सुविधा मिलेगी। सुपर स्पेशियलिटी विंग में 200 बेड की व्यवस्था होगी। मस्तिष्क, हृदय, गुर्दा, मूत्र रोग और पेट की बीमारियों का इलाज होगा। परामर्श व दवा दिए जाने के साथ ऑपरेशन भी किया जाएगा। अंदर ही मरीजों को सीटी स्कैन की भी सुविधा मिलेगी। मशीनें आ चुकी हैं। मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2023 में और भी कई काम होने हैं। इस पर पेश है हितेश सिंह की रिपोर्ट ।

गांव-गांव पहुंचाएंगे टेली मेडिसिन

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि वर्ष 2023 में टेली मेडिसिन की सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा। मरीज को अस्पताल पहुंचने बिना भी परामर्श मिल सकेगा। हेल्थ वेलनेस सेंटर की सेवाओं को और बेहतर किया जाएगा। डायग्नोस्टिक सेवाओं को अच्छा किया जाएगा। तमाम जांचें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ही हो सकेंगी।   

मेडिकल कॉलेज का कायाकल्प

प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि एसएन मेडिकल कॉलेज का 2023 में कायाकल्प हो जाएगा। इमरजेंसी से लेकर सभी विभागों में काम होंगे। लेडी लॉयल विस्तारीकरण योजना के प्रथम चरण शुरू होने की संभावना है। सेवाओं को बेहतर बनाया जाएगा। नए साल में 230 पैरामेडिकल स्टाफ मिल जाएगा, इससे चिकित्सीय सेवाएं और बेहतर हो जाएंगी। 

विज्ञापन

ओपीडी का रास्ता बदलेगा 

एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बृजेश शर्मा ने बताया कि एसएन मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाएं नए साल में और बेहतर हो जाएंगी। इमरजेंसी के लिए दो द्वार बनाए जा रहे हैं, आगरा कॉलेज की तरह से एंबुलेंस व अन्य वाहन मरीजों को लेकर प्रवेश करेंगे और राजामंडी की तरफ बाहर निकलेंगी। ओपीडी में प्रवेश का रास्ता भी बदल जाएगा और चौड़ा भी हो जाएगा। 

उपलब्धियां 

  • एसएन में मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर 14 थे, इनकी संख्या बढ़कर 26 हो गई है। मरीजों और चिकित्सकों दोनों के लिए सुविधा हो गई है।
  • सुपर स्पेशियलिटी की ओपीडी और ऑपरेशन दोनों अगस्त 2022 से ही शुरू करा दिए गए। ओपीडी में रोजाना करीब 150 मरीजाें को देखा जा रहा और ओटी में 12 से 14 ऑपरेशन किए जा रहे।
  • मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में पेन क्लीनिक की शुरूआत की गई। इसमें असहनीय दर्द के निवारण की व्यवस्था की गई है। कैंसर, रीढ़ की हड्डी आदि के मरीजों को सुविधा दी जा रही है।  
  • दस विभागों में पैरामेडिकल कोर्स शुरू किया गया है। साथ ही बीएससी नर्सिंग स्कूल का संचालन शुरू किया गया। पहले बैच में 40 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया। दूसरे बैच के लिए 60 सीटें हो गई हैं। 
  • मेडिकल कॉलेज में परास्नातक पाठ्यक्रमों में 43 सीटें बढ़ गई हैं। पहले 105 सीटें थीं, अब संख्या 148 है। आने वाले समय में इसका फायदा मिलेगा। मरीजों को और बेहतर इलाज मिल सकेगा। 
विज्ञापन

उम्मीदें 

  • एसएन मेडिकल कॉलेज में पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी काफी हद तक दूरी हो जाएगी। 230 पैरा मेडिकल स्टाफ मेडिकल कॉलेज को मिल जाएगा। 
  •  मेडिकल कॉलेज में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) लग जाएगा। इससे प्रदूषण नहीं होगा। प्लांट से निकलने वाले पानी का भी विभिन्न कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा।  
  • प्रशासनिक ब्लॉक के बाद ओपीडी परिसर की भी सभी सड़कें ठीक हो जाएंगी। सड़कें आरसीसी की बनाई जा रही हैं। क्षय व वक्ष रोग विभाग के पास सड़क बनाने के लिए गिट्टियां डाल दी गई हैं। 
  • एसएन इमरजेंसी से एंबुलेंस विभिन्न विभागों तक अंदर के से ही पहुंच जाएंगी। लेडी लॉयल से होकर रास्ता तैयार किया जा रहा है। काम तेजी से चल रहा है। 
  • अस्पताल के किचन को इस वर्ष और हाईटेक बनाया जाएगा। इसके लिए कुछ आटोमेटिक मशीनें लगाई जाएंगी। ओपीडी में खून जांच के लिए बनाए गए काउंटर के सामने जगह बढ़ाई जाएगी। 

डॉक्टरों की कमी के बीच बेहतर इलाज देने की चुनौती 

  • मेडिकल कॉलेज में मरीजों को अभी पूरी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। तमाम दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। मरीजों को अधिकतर दवाएं अंदर दिए जाने की दिशा में कदम उठाने होंगे।  
  • मेडिकल कॉलेज में बंदरों का उत्पात अधिक है। वाहनों के साथ भवनों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। नई सर्जरी बिल्डिंग की फॉल सीलिंग तोड़ दी है। मरीजों को भी परेशानी हो रही है। यहां से बंदरों को हटाना होगा। 
  • मेडिकल कॉलेज के बीच से नाला गुजर रहा है। इसमें गंदगी रहती है। नाले की सफाई और इसको ढकने होगा। मेडिकल कॉलेज के कायाकल्प के बीच नाले की व्यवस्था ठीक नहीं गई तो यह धब्बा सा लगेगा। 
  • ओपीडी में दिखाने के लिए पहुंचने वाले जरूरतमंद मरीजों को व्हीलचेयर और स्ट्रेचर उपलब्ध कराना होगा। ओपीडी के प्रथम तल पर जाने के लिए रैंप नहीं है। दिव्यांग मरीजों को परेशानी होती है। इस दिशा में कदम उठाने होंगे।  
  • जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। ऑपरेशन कम हो पा रहे हैं। मरीजों को दूसरी जगहों का रुख करना पड़ता है। रेडियोलॉजिस्ट का स्थानांतरण होने की वजह से एक दिसंबर से जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें