एसएन मेडिकल कॉलेज में प्लास्टर गिरने से 10 वर्षीय बच्चे की मौत के बाद बुधवार से जर्जर भवनों का ऑडिट शुरू कर दिया गया है। पांच सदस्यीय टीम भवनों की उम्र, पूर्व मरम्मत और उसकी गुणवत्ता की जांच करेगी, जबकि जर्जर हिस्सों में बैरिकेडिंग भी कराई जा रही है।
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के जर्जर भवनों का ऑडिट बुधवार से शुरू हो गया। पांच सदस्यीय टीम ने पुराने भवनों की सूची बनाकर रिकॉर्ड खंगालने का काम किया। यह टीम मरम्मत की गुणवत्ता भी देखेगी। उधर, कुछ जर्जर भवनों में अब भी मरीजों का इलाज हो रहा है। बारिश होने से खतरे की संभावना बढ़ गई है।
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एसएन में बीते शुक्रवार को बच्चा वार्ड का प्लास्टर गिरने से खंदारी निवासी आमिर रिजवी के 10 साल के बेटे उमेर की मौत हो गई थी। उसे गंभीर निमोनिया था। इसके बाद से बच्चा वार्ड बंद कर दिया गया। जबकि वहीं मेडिसिन, बाल रोग, नेत्र रोग, एकेडमिक ब्लॉक, ओपीडी नंबर दो, पुस्तकालय, गेस्ट हाउस में मरीजों को उपचार देकर भर्ती भी किया जा रहा है।
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आरोप है कि इन भवनों की इमारत कई जगह जर्जर है। प्लास्टर गिर रहा है, सरिया भी टूट रही हैं। जर्जर हिस्सों को बंद नहीं किया है। दो दिन से बारिश हो रही है। ऐसे में हादसे की आशंका बनी हुई है। उधर, ऑडिट टीम यह पता करने का प्रयास कर रही है कि भवन कितना पुराना है।
इसकी कितनी बार मरम्मत हुई। कार्यदायी संस्था कौन रही। कार्य गुणवत्तापरक हुआ कि नहीं।
इसमें एसएन के उप प्राचार्य डॉ. टीपी सिंह, डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह, डॉ. मनीष बंसल और लोक निर्माण विभाग के दो इंजीनियर शामिल रहे। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि भवनों का ऑडिट करा रहे हैं। जर्जर हिस्सों पर बैरिकेडिंग भी कराई जा रही है।